नमस्ते किसान भाइयों और बहनों,
क्या आप एक ऐसी फसल की तलाश में हैं जिसमें कम लागत, कम रिस्क और अधिक मुनाफा हो? क्या आप परंपरागत फसलों से हटकर कुछ ऐसा उगाना चाहते हैं जिसकी मांग बाजार में हमेशा बनी रहे? तो आज हम आपको एक ऐसी चमत्कारी फसल के बारे में बताएंगे जो आपकी आर्थिक स्थिति को पूरी तरह बदल सकती है – शकरकंद (Sweet Potato)!

शकरकंद न सिर्फ सेहत के लिए अमृत है बल्कि किसानों की जेब के लिए भी वरदान है। इसकी खेती से आप 1 लाख रुपए प्रति एकड़ तक का शुद्ध लाभ कमा सकते हैं।
क्यों शकरकंद है “अंधाधुन पैसा” कमाने का राज?
शकरकंद एक ऐसी फसल है जिसमें कई गुना लाभ की संभावना है। यह न सिर्फ पोषण से भरपूर है बल्कि इसकी बाजार में कभी कमी नहीं होती। आजकल हेल्थ कॉन्शियस लोगों में शकरकंद की मांग तेजी से बढ़ रही है।
मुख्य लाभ:
- उच्च उपज: 200-300 क्विंटल प्रति हेक्टेयर
- कम लागत: पारंपरिक फसलों की तुलना में 40-50% कम लागत
- बहुउपयोगी: सब्जी, आटा, चिप्स, हलवा, बेबी फूड सभी बनता है
- निर्यात की संभावना: यूरोप, अमेरीका में भारी मांग
- जलवायु अनुकूल: सूखा सहनशील, कम पानी में उगाया जा सकता है
शकरकंद की उन्नत किस्में
| क्रम | किस्म का नाम | विकसितकर्ता | पकने की अवधि (दिन) | औसत उपज (क्विंटल/हेक्टेयर) | विशेषताएं |
|---|---|---|---|---|---|
| 1 | पूसा सफेद | IARI, नई दिल्ली | 120-130 | 250-300 | उच्च उपज, सफेद गूदा |
| 2 | पूसा सुर्ख | IARI, नई दिल्ली | 110-120 | 200-250 | लाल छिलका, मीठा स्वाद |
| 3 | कोनकण अश्विनी | कोंकण कृषि विद्यापीठ | 90-100 | 180-220 | जल्दी तैयार, रोग प्रतिरोधी |
| 4 | एस-30 | सीपीआरआई, शिमला | 130-140 | 280-330 | बड़े आकार, उच्च उपज |
| 5 | वी-35 | महाराष्ट्र कृषि विश्वविद्यालय | 100-110 | 200-240 | ऑरेंज फ्लेश, बीटा कैरोटीन अधिक |
नोट: पूसा सफेद और पूसा सुर्ख किस्में उत्तर भारत के लिए सबसे उपयुक्त हैं। कोनकण अश्विनी कम अवधि वाली किस्म है जो 90-100 दिन में तैयार हो जाती है।
1 एकड़ में शकरकंद की खेती: लागत और आय विश्लेषण
| क्र.सं. | आय/व्यय का मद | विवरण | अनुमानित राशि (₹ में) |
|---|---|---|---|
| A. एक बार की लागत | |||
| 1. | खेत तैयारी (2 जुताई, रिज बनाना) | 4,000 | |
| 2. | शकरकंद कटिंग/बेलें | 10,000 कटिंग × ₹0.50/कटिंग | 5,000 |
| 3. | जैविक खाद (गोबर खाद) | 5 टन × ₹500/टन | 2,500 |
| 4. | रासायनिक उर्वरक (NPK) | 3,000 | |
| 5. | कीटनाशक/फफूंदनाशक | 2,500 | |
| कुल एक बार की लागत | 17,000 | ||
| B. चलने वाली लागत | |||
| 1. | सिंचाई (4-5 बार) | 3,000 | |
| 2. | निराई-गुड़ाई (2 बार) | 4,000 | |
| 3. | खुदाई व छंटाई मजदूरी | 8,000 | |
| 4. | परिवहन व विपणन | 5,000 | |
| 5. | भंडारण व पैकेजिंग | 3,000 | |
| कुल चलने वाली लागत | 23,000 | ||
| C. कुल लागत (A+B) | 40,000 | ||
| D. आय | |||
| 1. | उत्पादन | 200-250 क्विंटल/एकड़ (औसत) | |
| 2. | बाजार भाव | औसत ₹15/किलो (थोक) | |
| 3. | कुल आय (225 क्विंटल = 22,500 किलो) | 22,500 × ₹15 | 3,37,500 |
| E. शुद्ध लाभ | कुल आय – कुल लागत | 3,37,500 – 40,000 | 2,97,500 |
| F. अनुमानित अतिरिक्त आय | प्रसंस्कृत उत्पाद बेचकर | 50,000-1,00,000 | |
| G. कुल संभावित शुद्ध लाभ | E + F | 3.5-4 लाख |
नोट: यह गणना 1 एकड़ (0.4 हेक्टेयर) के लिए है। यदि आप हाई बीटा कैरोटीन वाली किस्में उगाते हैं तो भाव ₹20-25/किलो तक मिल सकता है। शकरकंद के चिप्स, आटा, या बेबी फूड बनाकर बेचने पर मुनाफा और बढ़ाया जा सकता है।
शकरकंद की उन्नत खेती का वैज्ञानिक तरीका
1. जलवायु और मिट्टी
- जलवायु: गर्म और आर्द्र जलवायु उपयुक्त
- तापमान: 25-35°C (अंकुरण के लिए 20°C से अधिक)
- मिट्टी: रेतीली दोमट या दोमट मिट्टी सर्वोत्तम
- pH मान: 5.5-6.5 (हल्की अम्लीय मिट्टी)
- जल निकास: उत्तम जल निकास वाली भूमि चुनें
2. खेत की तैयारी
- पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से गहरी जुताई करें
- 2-3 जुताई हैरो या कल्टीवेटर से करके मिट्टी को भुरभुरा बनाएं
- रिज बनाएं: ऊंची मेड़ (रिज) बनाएं – ऊंचाई: 30-35 सेमी, चौड़ाई: 45-50 सेमी
- मेड़ से मेड़ की दूरी: 60-75 सेमी रखें
- बुवाई से 15-20 दिन पहले 4-5 टन गोबर की सड़ी खाद प्रति एकड़ मिलाएं
3. रोपाई का समय और विधि
- रोपाई का उत्तम समय:
- खरीफ फसल: जून-जुलाई
- रबी फसल: सितंबर-अक्टूबर
- ग्रीष्म फसल: जनवरी-फरवरी (सिंचित क्षेत्रों में)
- पौध सामग्री: स्वस्थ बेलों की कटिंग (25-30 सेमी लंबी)
- रोपाई दूरी: मेड़ पर पौधे से पौधे की दूरी 25-30 सेमी
- रोपण गहराई: 5-7 सेमी गहरा रोपें
4. सिंचाई प्रबंधन
- पहली सिंचाई: रोपाई के तुरंत बाद
- दूसरी सिंचाई: रोपाई के 7-10 दिन बाद
- बाद की सिंचाई: 15-20 दिन के अंतराल पर
- कंद बनते समय: मिट्टी में नमी बनाए रखें
- पकने से 15-20 दिन पहले: सिंचाई बंद कर दें
5. उर्वरक प्रबंधन
- आधार खाद: बुवाई से पहले 40:60:80 किलो NPK प्रति एकड़
- टॉप ड्रेसिंग: रोपाई के 30-35 दिन बाद 25 किलो यूरिया
- जैविक खाद: वर्मीकम्पोस्ट 2 टन + नीम की खली 5 क्विंटल
- सूक्ष्म पोषक तत्व: बोरॉन 1 किलो और जिंक 2 किलो प्रति एकड़
6. खरपतवार नियंत्रण
- पहली निराई: रोपाई के 20-25 दिन बाद
- दूसरी निराई: 40-45 दिन बाद
- मिट्टी चढ़ाना: रोपाई के 45-50 दिन बाद मिट्टी चढ़ाएं ताकि कंद अच्छे बनें
- रासायनिक नियंत्रण: फ्लूक्लोरेलिन (बुवाई पूर्व) का प्रयोग
7. कीट एवं रोग प्रबंधन
- प्रमुख कीट: शकरकंद की बेल छेदक, सफेद ग्रब, दीमक
- प्रमुख रोग: कंद सड़न, बेल गलन, पत्ती धब्बा
- जैविक नियंत्रण:
- नीम तेल (5 मिली/लीटर पानी) का छिड़काव
- ट्राइकोडर्मा से बीज उपचार
- फेरोमोन ट्रैप की स्थापना
- रासायनिक नियंत्रण:
- बेल छेदक: क्विनलफॉस 25 ईसी (1 मिली/लीटर)
- कंद सड़न: कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 0.3% का छिड़काव
8. खुदाई और उपज
- खुदाई का समय: रोपाई के 90-120 दिन बाद (किस्म के अनुसार)
- संकेत: पत्तियां पीली पड़ने लगें, कंद परिवर्तन समाप्त हो जाए
- खुदाई विधि: कुदाल या आलू खोदने वाली मशीन से
- उपज: 200-300 क्विंटल प्रति एकड़
- सावधानी: खुदाई के समय कंदों को चोट न लगे
9. भंडारण और पैकेजिंग
- कंदों को छाया में 7-10 दिन सुखाएं (क्यूरिंग)
- स्वस्थ और बिना चोट वाले कंद अलग करें
- 12-15°C तापमान और 85-90% आर्द्रता पर भंडारण करें
- पुआल या लकड़ी के बुरादे में रखकर भंडारण किया जा सकता है
10. प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन
- शकरकंद चिप्स: तला हुआ या बेक्ड
- शकरकंद आटा: सूखे कंदों को पीसकर
- शकरकंद हलवा: मिठाई के रूप में
- बेबी फूड: प्यूरी बनाकर
- जैम और जेली: प्रसंस्कृत उत्पाद
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1. शकरकंद की खेती के लिए कौन सा क्षेत्र उपयुक्त है?
उत्तर: शकरकंद की खेती पूरे भारत में की जा सकती है। यह विशेष रूप से उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, महाराष्ट्र, गुजरात और मध्य प्रदेश में सफलतापूर्वक उगाया जाता है। यह फसल विभिन्न जलवायु परिस्थितियों के अनुकूल होती है।
Q2. बेल/कटिंग कहाँ से मिलेंगे और क्या स्वस्थ पौध सामग्री जरूरी है?
उत्तर:
- बेलों के स्रोत: कृषि विश्वविद्यालय, कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), प्रमाणित नर्सरी
- स्वस्थ बेलों के लक्षण: 25-30 सेमी लंबी, 6-8 गांठें, रोग मुक्त, हरी ताजी बेलें
- मूल्य: ₹0.40-0.60 प्रति कटिंग
- स्वयं तैयार करें: अपने पुराने पौधों से बेलें काटकर नर्सरी में नए पौधे तैयार करें
- सलाह: रोग मुक्त, स्वस्थ बेलों का ही प्रयोग करें
Q3. शकरकंद की रोपाई का सबसे अच्छा समय क्या है?
उत्तर:
- खरीफ फसल: जून-जुलाई (वर्षा पर आधारित)
- रबी फसल: सितंबर-अक्टूबर (सिंचित क्षेत्र)
- ग्रीष्म फसल: जनवरी-फरवरी (उच्च सिंचाई वाले क्षेत्र)
- उत्तम समय: जून-जुलाई में रोपाई करने पर उपज सर्वोत्तम मिलती है
Q4. क्या शकरकंद की खेती कम पानी वाले क्षेत्रों में की जा सकती है?
उत्तर: हाँ, शकरकंद एक सूखा सहनशील फसल है। इसे पारंपरिक फसलों की तुलना में 30-40% कम पानी की आवश्यकता होती है। यह वर्षा आधारित खेती के लिए उत्तम है। ड्रिप इरिगेशन से और भी पानी बचाया जा सकता है।
Q5. शकरकंद की फसल में कौन-कौन से रोग लगते हैं और उनकी रोकथाम कैसे करें?
उत्तर:
मुख्य रोग:
- कंद सड़न: कंदों पर काले धब्बे, अंदर से सड़न
- रोकथाम: खेत में जल निकास अच्छा रखें, स्वस्थ बेलें प्रयोग करें
- बेल गलन: बेलें गलने लगती हैं
- रोकथाम: कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 0.3% का छिड़काव
- पत्ती धब्बा: पत्तियों पर भूरे धब्बे
- रोकथाम: मैन्कोजेब 0.25% का छिड़काव
Q6. शकरकंद के बाजार भाव कैसे रहते हैं?
उत्तर:
- न्यूनतम बाजार मूल्य: ₹10-12 प्रति किलो (थोक)
- औसत बाजार मूल्य: ₹15-20 प्रति किलो
- उच्च गुणवत्ता (ऑरेंज फ्लेश): ₹20-25 प्रति किलो
- जैविक शकरकंद: ₹30-40 प्रति किलो
- प्रसंस्कृत उत्पाद: चिप्स ₹200-300/किलो, आटा ₹80-100/किलो
- महत्वपूर्ण: सर्दियों में भाव सबसे अधिक रहते हैं क्योंकि इस समय शकरकंद की मांग बढ़ जाती है।
Q7. क्या शकरकंद की खेती के लिए सरकारी सहायता मिल सकती है?
उत्तर: हाँ, विभिन्न योजनाओं के तहत:
- प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना: ड्रिप/स्प्रिंकलर पर 50-80% सब्सिडी
- राष्ट्रीय बागवानी मिशन: रोपण सामग्री पर सहायता
- किसान क्रेडिट कार्ड: खेती के लिए ऋण सुविधा
- फसल बीमा योजना: फसल नुकसान पर बीमा
- मूल्य संवर्धन योजना: प्रसंस्करण इकाई लगाने के लिए अनुदान
Q8. शकरकंद की खेती में सबसे बड़ी चुनौती क्या है और उसका समाधान?
उत्तर:
- चुनौती 1: कंद सड़न रोग
- समाधान: उचित जल निकास, स्वस्थ बेलें, फसल चक्र अपनाएं
- चुनौती 2: भंडारण में नुकसान
- समाधान: उचित क्यूरिंग, नियंत्रित तापमान पर भंडारण
- चुनौती 3: बाजार में उचित मूल्य न मिलना
- समाधान: प्रसंस्करण करके बेचें, सीधे उपभोक्ता तक पहुंचें, सहकारी समिति बनाएं
Q9. क्या शकरकंद की खेती जैविक तरीके से की जा सकती है?
उत्तर: हाँ, शकरकंद जैविक खेती के लिए आदर्श फसल है। जैविक शकरकंद का बाजार भाव 50-100% अधिक मिलता है। जैविक खेती के लिए:
- जैविक खाद: गोबर खाद, वर्मीकम्पोस्ट, जीवामृत
- जैविक कीटनाशक: नीम तेल, गौमूत्र, लहसुन का घोल
- प्रमाणन: जैविक प्रमाणन लेकर उच्च मूल्य प्राप्त करें
- फसल चक्र: दलहनी फसलों के साथ फसल चक्र अपनाएं
Q10. शकरकंद से अतिरिक्त आय कैसे बढ़ाएं?
उत्तर:
- मूल्य संवर्धन: चिप्स, आटा, हलवा, प्यूरी बनाकर बेचें
- प्रसंस्करण: जैम, जेली, अचार बनाएं
- बेबी फूड: शकरकंद प्यूरी बेबी फूड कंपनियों को बेचें
- सीधी बिक्री: ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया, अपनी दुकान
- निर्यात: प्रसंस्कृत शकरकंद उत्पादों का निर्यात करें
- पशु आहार: छिलके और छोटे कंद पशु आहार के रूप में बेचें
स्वास्थ्य और समृद्धि का दोहरा लाभ
किसान भाइयों, शकरकंद की खेती कम लागत और अधिक मुनाफे वाली खेती का उत्तम उदाहरण है। यह न सिर्फ आपको आर्थिक लाभ देगी बल्कि समाज को पोषण से भरपूर भोजन भी उपलब्ध कराएगी। बदलती जीवनशैली में शकरकंद की मांग दिनोंदिन बढ़ रही है।
सफलता के मंत्र:
- सही किस्म चुनें: पूसा सफेद या पूसा सुर्ख
- सही समय पर रोपाई: जून-जुलाई उत्तम
- वैज्ञानिक तरीका अपनाएं: रिज विधि, संतुलित उर्वरक
- बाजार शोध करें: पहले से बाजार की योजना बनाएं
आज ही शुरुआत करें:
- छोटे स्तर (0.5 एकड़) से प्रयोग शुरू करें
- स्थानीय कृषि विभाग या कृषि विज्ञान केंद्र से प्रशिक्षण लें
- अनुभवी किसानों से सलाह लें
- प्रसंस्करण की बुनियादी जानकारी हासिल करें
याद रखें, आधुनिक युग में सफल किसान वही है जो बदलती मांग के अनुसार फसल चयन करता है। शकरकंद न सिर्फ आपकी आय बढ़ाएगा बल्कि आपको एक प्रगतिशील किसान के रूप में भी स्थापित करेगा।
इस सीजन में शकरकंद की खेती को अपनाएं और “अंधाधुन पैसा” कमाने का सपना साकार करें!
शुभकामनाओं सहित…
~ आपका कृषि मार्गदर्शक
अनुभव साझा करें: यदि आप पहले से ही शकरकंद की खेती कर रहे हैं, तो कृपया अपने अनुभव नीचे कमेंट में साझा करें। आपका अनुभव अन्य किसानों के लिए मार्गदर्शन करेगा।
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