किसानों के लिए वरदान है सबौर मंसूरी धान
दोस्तों, क्या आप जानते हैं कि वैज्ञानिकों ने धान की एक ऐसी नई किस्म तैयार की है जो कम खर्च में ज्यादा पैदावार देती है? इसका नाम है सबौर मंसूरी धान। यह धान किसानों के लिए वरदान साबित हो रहा है। इसे उगाने में कम पानी लगता है, कम खाद डालनी पड़ती है और कीटनाशक भी कम इस्तेमाल करने पड़ते हैं। फिर भी इसकी पैदावार बहुत अच्छी होती है।

सबौर मंसूरी धान क्या है?
सबौर मंसूरी धान भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और उत्तराखंड के पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा तैयार की गई एक नई किस्म है। यह धान परंपरागत मंसूरी धान से बिल्कुल अलग है। इसे “सबौर” नाम इसलिए दिया गया क्योंकि यह सुबह के समय (सबेरे) जल्दी पककर तैयार हो जाती है।
सबौर मंसूरी धान की खास बातें
1. कम समय में तैयार होना
यह धान बुआई के सिर्फ 90 से 100 दिन में पककर तैयार हो जाती है। जबकि दूसरी धान की किस्मों को 120 से 140 दिन लगते हैं। इस तरह किसान एक फसल जल्दी काटकर दूसरी फसल लगा सकते हैं।
2. कम पानी की जरूरत
सबौर मंसूरी धान को सामान्य धान से 40% कम पानी चाहिए। यह सूखा सहन करने की अच्छी क्षमता रखती है। पानी की कमी वाले इलाकों के लिए यह बहुत उपयोगी है।
3. कम खाद की आवश्यकता
इस धान को उगाने के लिए सामान्य धान से 25% कम नाइट्रोजन खाद की जरूरत पड़ती है। इससे किसानों का खर्च कम होता है और मिट्टी भी ज्यादा खराब नहीं होती।
4. रोगों से लड़ने की क्षमता
सबौर मंसूरी धान में झुलसा रोग और ब्लास्ट रोग से लड़ने की अच्छी क्षमता है। इसलिए कीटनाशक भी कम इस्तेमाल करने पड़ते हैं।
5. अच्छी पैदावार
हालांकि यह कम समय में तैयार होती है, फिर भी इसकी पैदावार बहुत अच्छी है। प्रति हेक्टेयर 50 से 60 क्विंटल तक उपज मिल सकती है।
सबौर मंसूरी धान उगाने का तरीका
1. बीज की मात्रा और बुआई
- बीज दर: प्रति हेक्टेयर 20-25 किलोग्राम बीज पर्याप्त है
- बुआई का समय: जून के अंत से जुलाई के पहले सप्ताह तक
- बुआई की दूरी: पंक्ति से पंक्ति 20 सेंटीमीटर, पौधे से पौधे 10 सेंटीमीटर
2. खाद और उर्वरक
- नाइट्रोजन: 80-90 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर (सामान्य धान में 120 किलोग्राम लगता है)
- फॉस्फोरस: 40-50 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर
- पोटाश: 40-50 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर
- जैविक खाद: 5-10 टन गोबर की खाद डालें तो और अच्छा
3. सिंचाई प्रबंधन
- पहली सिंचाई बुआई के तुरंत बाद
- फिर आवश्यकतानुसार 5-7 दिन के अंतर पर सिंचाई
- खेत में पानी भरकर न रखें, नमी बनाए रखें
- दाना बनते समय खेत में नमी जरूर बनाए रखें
4. खरपतवार नियंत्रण
- बुआई के 20-25 दिन बाद निराई-गुड़ाई करें
- या फिर खरपतवारनाशी दवा का इस्तेमाल करें
- दूसरी निराई 40-45 दिन बाद करें
सबौर मंसूरी धान के फायदे
किसानों के लिए फायदे:
- कम लागत: पानी, खाद और कीटनाशक कम लगने से खेती की लागत कम होती है
- जल्दी तैयार: कम दिनों में तैयार होने से समय की बचत
- अच्छी कीमत: चावल की गुणवत्ता अच्छी होने से बाजार में अच्छी कीमत मिलती है
- जोखिम कम: रोगों के प्रति प्रतिरोधी होने से फसल खराब होने का डर कम
- दोहरी फसल: जल्दी तैयार होने से रबी की फसल भी समय पर लगाई जा सकती है
पर्यावरण के लिए फायदे:
- पानी की बचत: कम पानी में उगने से पानी का संरक्षण
- मिट्टी की सेहत: कम रसायनिक खाद से मिट्टी का स्वास्थ्य बेहतर
- जैव विविधता: कम कीटनाशकों से मित्र कीट बचते हैं
सबौर मंसूरी धान के चावल की खासियत
- दाने की लंबाई: चावल के दाने मध्यम लंबाई के होते हैं
- पकाने में आसान: चावल जल्दी पक जाते हैं, गैस की बचत होती है
- स्वाद: परंपरागत मंसूरी धान जैसा ही स्वादिष्ट स्वाद
- पोषण: इसमें प्रोटीन और अन्य पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं
- भंडारण: लंबे समय तक स्टोर किया जा सकता है
सफल किसानों की कहानियाँ
उत्तराखंड के रुद्रपुर के किसान श्री हरीश चंद्र ने पिछले साल सबौर मंसूरी धान लगाई थी। वे बताते हैं, “मैंने 2 हेक्टेयर में यह धान लगाई थी। सामान्य धान की तुलना में मुझे 30% कम पानी देना पड़ा और खाद भी कम लगी। फिर भी मुझे 55 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज मिली। जल्दी तैयार होने से मैंने खेत में सरसों भी लगा ली।”
बिहार के पूर्णिया जिले की किसान सुश्री मीना देवी कहती हैं, “हमारे इलाके में अक्सर सूखा पड़ता है। सबौर मंसूरी धान ने हमारी मुश्किलें कम की हैं। कम पानी में भी अच्छी पैदावार मिल रही है। महिलाओं के लिए यह धान किसी वरदान से कम नहीं है।”
सबौर मंसूरी धान कहाँ और कैसे मिलेगी?
सबौर मंसूरी धान के बीज निम्नलिखित स्थानों से प्राप्त किए जा सकते हैं:
- कृषि विज्ञान केंद्र: आपके जिले के कृषि विज्ञान केंद्र पर
- राज्य बीज निगम: राज्य सरकार के बीज निगम के केंद्रों पर
- कृषि विश्वविद्यालय: पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय या अन्य कृषि विश्वविद्यालय
- सरकारी बीज भंडार: सरकारी बीज भंडारों पर
- मान्यता प्राप्त बीज विक्रेता: सरकार से मान्यता प्राप्त बीज दुकानों पर
सावधानी: हमेशा प्रमाणित बीज ही खरीदें। नकली या घटिया बीज से अच्छी पैदावार नहीं मिलेगी।
सरकारी सहायता और योजनाएँ
भारत सरकार और राज्य सरकारें सबौर मंसूरी धान को बढ़ावा दे रही हैं:
- बीज पर सब्सिडी: कुछ राज्यों में इस धान के बीज पर 50% तक सब्सिडी दी जा रही है
- प्रशिक्षण: कृषि विभाग द्वारा निःशुल्क प्रशिक्षण कार्यक्रम
- प्रदर्शन खेत: किसानों को दिखाने के लिए प्रदर्शन खेत बनाए जा रहे हैं
- बीमा योजना: फसल बीमा योजना के तहत इस धान को भी शामिल किया गया है
अन्य धान किस्मों से तुलना
| विशेषता | सबौर मंसूरी धान | परंपरागत मंसूरी धान | हाइब्रिड धान |
|---|---|---|---|
| पकने का समय | 90-100 दिन | 120-140 दिन | 110-130 दिन |
| पानी की आवश्यकता | कम (40% कम) | ज्यादा | बहुत ज्यादा |
| खाद की आवश्यकता | कम (25% कम नाइट्रोजन) | सामान्य | ज्यादा |
| उपज | 50-60 क्विंटल/हेक्टेयर | 40-50 क्विंटल/हेक्टेयर | 60-70 क्विंटल/हेक्टेयर |
| रोग प्रतिरोधकता | अच्छी | कम | मध्यम |
निष्कर्ष
सबौर मंसूरी धान आधुनिक कृषि का एक बेहतरीन उदाहरण है जो किसानों की आमदनी बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण का भी ध्यान रखती है। यह किसानों के लिए कम लागत में अधिक मुनाफा कमाने का रास्ता खोलती है। पानी की कमी, बढ़ती खाद की कीमतें और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों के बीच सबौर मंसूरी धान एक वरदान साबित हो सकती है।
अगर आप धान की खेती करते हैं, तो एक बार सबौर मंसूरी धान जरूर आजमाएँ। छोटे स्तर पर शुरू करें, अनुभव लें और फिर बड़े स्तर पर लगाएँ। याद रखें, नई तकनीक और नई किस्में ही कृषि को लाभदायक बना सकती हैं।
किसान भाइयों और बहनों, आधुनिक कृषि के इस युग में नई जानकारियाँ हासिल करना और नई तकनीकों को अपनाना बहुत जरूरी है। सबौर मंसूरी धान ऐसी ही एक नई तकनीक है जो आपकी मेहनत का सही मूल्य दिला सकती है।
जरूरी सलाह: किसी भी नई किस्म को अपनाने से पहले अपने क्षेत्र के कृषि विशेषज्ञ या कृषि विज्ञान केंद्र से सलाह जरूर लें। वे आपको आपके क्षेत्र की मिट्टी और जलवायु के अनुसार सही सलाह देंगे।