रामदाना (अमरंथ): लघु किसानों के लिए सोना, प्रति हेक्टेयर 80 हजार रु तक का मुनाफा

पारंपरिक अनाजों की खेती से हटकर, आधुनिक समय में रामदाना (अमरंथ) की खेती छोटे और सीमांत किसानों के लिए एक लाभदायक विकल्प बनकर उभर रही है। यह पोषक तत्वों से भरपूर अनाज न सिर्फ स्वास्थ्य के लिए अच्छा है, बल्कि इसकी बढ़ती मांग के कारण किसानों को प्रति हेक्टेयर 50,000 से 80,000 रुपये तक का शुद्ध मुनाफा दे सकता है।

रामदाना

रामदाना क्यों है विशेष?

रामदाना, जिसे राजगीरा या अमरंथ भी कहते हैं, एक प्राचीन अनाज है जो:

  • ग्लूटेन-फ्री और प्रोटीन से भरपूर
  • कम पानी और कम देखभाल में अच्छी पैदावार
  • बदलते मौसम के प्रति सहनशील
  • बाजार में उच्च मूल्य प्राप्त

रामदाना खेती का आर्थिक विश्लेषण (प्रति हेक्टेयर)

खर्च का विवरणराशि (रुपये में)आय का विवरणराशि (रुपये में)
बीज की लागत1,500 – 2,000अनाज उत्पादन (12-15 क्विंटल)60,000 – 90,000
खाद एवं उर्वरक5,000 – 7,000चारा उत्पादन10,000 – 15,000
सिंचाई3,000 – 4,000कुल आय70,000 – 1,05,000
श्रम लागत8,000 – 10,000
कीटनाशक2,000 – 3,000
कटाई व गहाई4,000 – 5,000
परिवहन2,000 – 3,000
कुल खर्च25,500 – 34,000शुद्ध मुनाफा44,500 – 71,000

नोट: कीमतें क्षेत्र और बाजार स्थिति के अनुसार भिन्न हो सकती हैं

बाजार मूल्य एवं उत्पादन

उत्पादउत्पादन (प्रति हेक्टेयर)बाजार मूल्य (प्रति किलो)कुल मूल्य (रुपये)
रामदाना अनाज12-15 क्विंटल40-60 रुपये48,000 – 90,000
हरा चारा40-50 क्विंटल2-3 रुपये8,000 – 15,000
कुल संभावित आय56,000 – 1,05,000

रामदाना की खेती के लिए आवश्यक स्थितियाँ

  • जलवायु: शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्र उपयुक्त
  • मिट्टी: दोमट मिट्टी, जल निकासी उचित हो
  • बुवाई का समय: खरीफ ऋतु (जुलाई-अगस्त)
  • कटाई का समय: अक्टूबर-नवंबर
  • पकने की अवधि: 90-120 दिन

सरकारी सहायता

भारत सरकार और कई राज्य सरकारें रामदाना जैसे पोषक अनाजों की खेती को प्रोत्साहित कर रही हैं:

  • बीज पर सब्सिडी (50% तक)
  • खरीद की गारंटी
  • प्रसंस्करण इकाइयों को प्रोत्साहन
  • जैविक खेती के लिए अतिरिक्त सहायता

सामान्य प्रश्न (FAQ)

Q1: रामदाना की खेती के लिए कितनी बार सिंचाई की आवश्यकता होती है?
A: रामदाना कम पानी वाली फसल है। पूरे मौसम में 4-5 सिंचाई पर्याप्त होती है, विशेषकर बुवाई, पुष्पन और दाना भरने के चरण में।

Q2: रामदाना का बाजार कहाँ है?
A: स्वास्थ्य बाजार, आयुर्वेदिक कंपनियाँ, बेकरी उत्पाद, पोषण केंद्र और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म जैसे Amazon, BigBasket में इसकी मांग है।

Q3: क्या रामदाना की खेती जैविक तरीके से की जा सकती है?
A: हाँ, रामदाना जैविक खेती के लिए उत्तम फसल है। जैविक रामदाना का बाजार मूल्य 25-30% अधिक मिलता है।

Q4: रामदाना की उन्नत किस्में कौन-सी हैं?
A: गौरी, अरुण, सुजाता, पूसा किरण, को.4 (तमिलनाडु), आरMA-7 (महाराष्ट्र) आदि उन्नत किस्में हैं।

Q5: रामदाना की खेती में मुख्य चुनौतियाँ क्या हैं?
A: खरपतवार नियंत्रण, समय पर कटाई (दाने झड़ने की समस्या), और प्रसंस्करण सुविधाओं का अभाव मुख्य चुनौतियाँ हैं।

Q6: रामदाना से कौन-कौन से उत्पाद बनाए जा सकते हैं?
A: आटा, बिस्कुट, नमकीन, लड्डू, चिवड़ा, पास्ता, दलिया, और प्रोटीन सप्लीमेंट बनाए जा सकते हैं।

Q7: क्या रामदाना की खेती के लिए सरकार से मदद मिलती है?
A: हाँ, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन और कई राज्य सरकारों की योजनाओं के तहत बीज सब्सिडी, प्रशिक्षण और विपणन सहायता मिलती है।

सफलता के टिप्स

  1. उन्नत बीज चुनें: स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र से उपयुक्त किस्म का चयन करें
  2. समय पर बुवाई: जुलाई के अंत तक बुवाई कर दें
  3. खरपतवार प्रबंधन: शुरुआती 30 दिन महत्वपूर्ण होते हैं
  4. कटाई का सही समय: जब पौधे पीले पड़ जाएं और दाने सख्त हों
  5. मूल्य संवर्धन: सीधे अनाज बेचने के बजाय आटा या अन्य उत्पाद बनाकर बेचें

रामदाना की खेती पारंपरिक फसलों की तुलना में कम जोखिम और अधिक मुनाफे वाली विकल्प है। स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के साथ इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। छोटी जोत वाले किसान भी कम लागत में इसकी खेती कर अच्छा लाभ कमा सकते हैं। शुरुआत छोटे क्षेत्र से करें और अनुभव होने पर इसे बढ़ाएं।

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