बाजार में 50-60 रुपए किलो बिक रही मेथी, जल्दी तैयार और उपज के लिए लगाएं यह किस्म – बीज और पत्ते दोनों से होगी दोगुनी कमाई!

नमस्ते किसान भाइयों और बहनों,

क्या आप एक ऐसी फसल की तलाश में हैं जो कम समय में तैयार हो, बाजार में ऊंचे दामों पर बिके और दोहरा लाभ दे? तो आज हम आपको मेथी के बारे में बताएंगे, जो न सिर्फ आपकी रसोई में स्वाद बढ़ाती है बल्कि आपकी जेब में पैसा भी बढ़ा सकती है। वर्तमान में बाजार में मेथी के पत्ते 50-60 रुपए प्रति किलो तक बिक रहे हैं, जबकि मेथी दाना 80-120 रुपए प्रति किलो तक बिकता है।

मेथी

ऐसे में अगर आप एक ऐसी किस्म लगाएं जो पत्ते और दाना दोनों के लिए उपयुक्त हो, तो आप एक ही फसल से दोगुना मुनाफा कमा सकते हैं। यह किस्म है – “पूसा कसूरी” (Pusa Kasuri)!

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क्यों पूसा कसूरी किस्म है बेहतरीन?

पूसा कसूरी मेथी भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), नई दिल्ली द्वारा विकसित की गई है। यह किस्म विशेष रूप से पत्तों (साग) और दाने दोनों के लिए उपयुक्त है और इसकी खुशबू व स्वाद बाजार में सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है।

मुख्य विशेषताएं:

  • दोहरा उपयोग: हरे पत्ते (साग) और दाने दोनों के लिए उत्तम
  • जल्दी तैयार: पत्तों के लिए 25-30 दिन, दाने के लिए 90-100 दिन
  • उच्च उपज: हरे पत्ते: 80-100 क्विंटल/हेक्टेयर, दाना: 10-12 क्विंटल/हेक्टेयर
  • उत्तम गुणवत्ता: पत्ते कोमल, हरे और सुगंधित; दाने बड़े और सुगंधित
  • रोग प्रतिरोधक: पाउडरी मिल्ड्यू और जड़ सड़न के प्रति सहनशील

विभिन्न मेथी किस्मों की तुलना

क्रमकिस्म का नामविकसितकर्तापकने की अवधि (दिन)औसत उपज (पत्ते)औसत उपज (दाना)मुख्य विशेषताएं
1पूसा कसूरीIARI, नई दिल्लीपत्ते: 25-30, दाना: 90-10080-100 क्विंटल/हेक्टेयर10-12 क्विंटल/हेक्टेयरदोहरा उपयोग, सुगंधित, बाजार में उच्च मांग
2आरएमटी १आरएयू, उदयपुरपत्ते: 20-25, दाना: 85-9070-90 क्विंटल/हेक्टेयर8-10 क्विंटल/हेक्टेयरजल्दी तैयार, अधिक पत्तेदार
3लाम सिलेक्शन १जीबीपीयूएटी, पंतनगरपत्ते: 25-30, दाना: 95-10075-95 क्विंटल/हेक्टेयर9-11 क्विंटल/हेक्टेयरपत्ते हरे व कोमल, रोग रोधी
4एचएम १०३एचएयू, हिसारपत्ते: 30-35, दाना: 100-11085-105 क्विंटल/हेक्टेयर11-13 क्विंटल/हेक्टेयरउच्च उपज, दाने बड़े
5को-१टीएनएयू, कोयंबटूरपत्ते: 30-35, दाना: 105-11580-100 क्विंटल/हेक्टेयर10-12 क्विंटल/हेक्टेयरदक्षिण भारत के लिए उपयुक्त

1 एकड़ में पूसा कसूरी मेथी की खेती: लागत और आय विश्लेषण (दोहरा लाभ – पत्ते + दाना)

क्र.सं.आय/व्यय का मदविवरणअनुमानित राशि (₹ में)
A. एक बार की लागत
1.खेत तैयारी (2 जुताई, पाटा)4,000
2.पूसा कसूरी बीज25 किलो × ₹200/किलो5,000
3.जैविक खाद (गोबर खाद)8 टन × ₹500/टन4,000
4.रासायनिक उर्वरक (NPK)3,500
5.कीटनाशक/फफूंदनाशक2,500
कुल एक बार की लागत19,000
B. चलने वाली लागत
1.सिंचाई (4-5 बार)3,000
2.निराई-गुड़ाई2 बार4,000
3.कटाई व पैकेजिंग मजदूरीपत्ते + दाना8,000
4.परिवहन व विपणन5,000
कुल चलने वाली लागत20,000
C. कुल लागत (A+B)39,000
D. आय
1. मेथी साग (पत्ते) से आय:
– उत्पादन30-35 क्विंटल/एकड़ (3,000-3,500 किलो)
– बाजार भावऔसत ₹40/किलो (थोक)
– कुल आय3,250 किलो × ₹401,30,000
2. मेथी दाना से आय:
– उत्पादन4-5 क्विंटल/एकड़ (400-500 किलो)
– बाजार भावऔसत ₹90/किलो
– कुल आय450 किलो × ₹9040,500
3. कुल सकल आयपत्ते + दाना1,70,500
E. शुद्ध लाभकुल आय – कुल लागत1,70,500 – 39,0001,31,500
F. अनुमानित अतिरिक्त आयसूखे पत्ते (कसूरी मेथी) बेचकर20,000-30,000
G. कुल संभावित शुद्ध लाभE + F1.5-1.6 लाख

नोट: यह गणना 1 एकड़ (0.4 हेक्टेयर) के लिए है। यदि आप केवल मेथी साग (पत्ते) के लिए खेती करते हैं, तो साल में 4-5 बार फसल ले सकते हैं और उपज 2-3 गुना बढ़ा सकते हैं।


पूसा कसूरी मेथी की उन्नत खेती का वैज्ञानिक तरीका

1. खेत और मिट्टी की तैयारी

  • मिट्टी: दोमट या बलुई दोमट जिसमें जल निकास अच्छा हो
  • pH मान: 6.0-7.0 (तटस्थ से हल्का अम्लीय)
  • खेत तैयारी: पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से करें, फिर 2-3 जुताई हैरो या कल्टीवेटर से करें
  • पाटा लगाकर खेत समतल करें
  • खाद: बुवाई से 15-20 दिन पहले 8-10 टन सड़ी गोबर की खाद प्रति एकड़ मिलाएं

2. बुवाई का समय और विधि

  • उत्तरी भारत के लिए:
  • रबी सीजन: अक्टूबर-नवंबर (दाने के लिए उत्तम)
  • ग्रीष्म सीजन: फरवरी-मार्च (पत्तों के लिए उत्तम)
  • दक्षिण भारत के लिए: पूरे साल बुवाई संभव
  • बीज दर:
  • केवल पत्तों के लिए: 20-25 किलो/एकड़
  • दाने के लिए: 10-12 किलो/एकड़
  • दोनों के लिए: 15-20 किलो/एकड़
  • बुवाई विधि: छिड़काव या कतार विधि
  • कतार से कतार दूरी: 20-25 सेमी
  • पौधे से पौधे दूरी: 5-7 सेमी
  • बीज की गहराई: 1-2 सेमी

3. सिंचाई प्रबंधन

  • पहली सिंचाई: बुवाई के तुरंत बाद (हल्की)
  • दूसरी सिंचाई: बुवाई के 7-10 दिन बाद
  • बाद की सिंचाई: 8-10 दिन के अंतराल पर
  • विशेष ध्यान: फूल आने और दाना बनने की अवस्था में खेत में नमी बनाए रखें
  • पत्ते वाली फसल को 4-5 दिन के अंतराल पर पानी दें

4. उर्वरक प्रबंधन

  • आधार खाद: बुवाई से पहले 40:60:20 किलो NPK प्रति एकड़
  • टॉप ड्रेसिंग:
  • पत्तों की फसल: प्रत्येक कटाई के बाद 20 किलो यूरिया
  • दाने की फसल: फूल आने से पहले 20 किलो यूरिया
  • जैविक खेती के लिए: वर्मीकम्पोस्ट 2 टन + नीम की खली 5 क्विंटल प्रति एकड़

5. खरपतवार नियंत्रण

  • पहली निराई: बुवाई के 15-20 दिन बाद
  • दूसरी निराई: 35-40 दिन बाद
  • रासायनिक नियंत्रण: बुवाई के तुरंत बाद पेंडीमेथिलिन 30 ईसी (1 लीटर प्रति एकड़) का छिड़काव

6. कीट एवं रोग प्रबंधन

  • प्रमुख कीट: एफिड, सफेद मक्खी, लीफ माइनर
  • प्रमुख रोग: पाउडरी मिल्ड्यू, जड़ सड़न, अंगमारी
  • जैविक नियंत्रण:
  • नीम तेल (5 मिली/लीटर पानी) का छिड़काव
  • गौमूत्र + तम्बाकू का घोल
  • फेरोमोन ट्रैप @ 5 प्रति एकड़
  • रासायनिक नियंत्रण (आवश्यकता पड़ने पर):
  • पाउडरी मिल्ड्यू: घुलनशील गंधक 0.2% का छिड़काव
  • एफिड: इमिडाक्लोप्रिड 0.5 मिली/लीटर

7. कटाई और उपज

पत्तों (साग) की कटाई:

  • पहली कटाई: बुवाई के 25-30 दिन बाद
  • कटाई विधि: जमीन से 2-3 सेमी ऊपर से काटें
  • अगली कटाई: हर 15-20 दिन बाद
  • कुल कटाई: 3-4 बार

दाने की कटाई:

  • समय: बुवाई के 90-100 दिन बाद
  • संकेत: पौधे पीले पड़ जाएं, दाने सख्त हो जाएं
  • कटाई विधि: पौधों को जड़ से उखाड़ें या काटें
  • 3-4 दिन धूप में सुखाएं, फिर झाड़कर दाने अलग करें

8. पैकेजिंग और भंडारण

हरे पत्तों के लिए:

  • पत्तों को साफ पानी से धोएं
  • पानी सुखाकर पॉलीथीन पैक या पन्नी में बंडल बनाएं
  • 4-5°C तापमान पर 7-10 दिन तक रख सकते हैं

दाने के लिए:

  • दानों को अच्छी तरह सुखाएं (नमी 8-10%)
  • एयरटाइट बर्तन या प्लास्टिक की बोरियों में भरें
  • ठंडी, सूखी और अंधेरी जगह पर रखें

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1. क्या पूसा कसूरी किस्म वाकई पत्ते और दाने दोनों के लिए अच्छी है?

उत्तर: हाँ, पूसा कसूरी विशेष रूप से दोहरे उपयोग के लिए विकसित की गई है। इसके पत्ते कोमल, हरे और सुगंधित होते हैं जो साग के लिए उत्तम हैं। इसके दाने बड़े और सुगंधित होते हैं जिनकी मांग मसाले और आयुर्वेदिक दवाओं में है।

Q2. मेथी की बुवाई का सबसे अच्छा समय क्या है?

उत्तर:

  • पत्तों (साग) के लिए: सितंबर से मार्च (ठंड का मौसम उत्तम)
  • दाने के लिए: अक्टूबर-नवंबर (रबी सीजन)
  • ग्रीष्म फसल: फरवरी-मार्च में बुवाई, लेकिन सिंचाई का विशेष ध्यान रखें

Q3. बीज कहाँ से मिलेंगे और क्या प्रमाणित बीज जरूरी है?

उत्तर:

  • बीज स्रोत: भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), नई दिल्ली; राज्य बीज निगम; प्रमाणित बीज विक्रेता
  • प्रमाणित बीज के लाभ: अंकुरण दर 85-90%, शुद्ध किस्म, रोग मुक्त
  • मूल्य: ₹180-250 प्रति किलो (किस्म और गुणवत्ता के अनुसार)
  • सलाह: हमेशा प्रमाणित बीज ही खरीदें, घर के बचे बीज उपज कम देते हैं

Q4. क्या मेथी की खेती कम पानी वाले क्षेत्रों में की जा सकती है?

उत्तर: हाँ, मेथी एक कम पानी वाली फसल है। इसे सामान्य फसलों की तुलना में 40-50% कम पानी की आवश्यकता होती है। ड्रिप इरिगेशन या स्प्रिंकलर से और भी पानी बचाया जा सकता है। वर्षा आधारित क्षेत्रों में भी इसे सफलतापूर्वक उगाया जा सकता है।

Q5. मेथी की फसल में कौन-कौन से रोग लगते हैं और उनकी रोकथाम कैसे करें?

उत्तर:
मुख्य रोग:

  1. पाउडरी मिल्ड्यू: पत्तों पर सफेद पाउडर जैसा दिखाई देता है
  • रोकथाम: खेत में हवा का संचार अच्छा रखें, घुलनशील गंधक 0.2% का छिड़काव
  1. जड़ सड़न: पौधे मुरझा जाते हैं, जड़ें सड़ जाती हैं
  • रोकथाम: जल निकास अच्छा रखें, ट्राइकोडर्मा से बीज उपचार करें
  1. अंगमारी: पत्तों पर भूरे धब्बे
  • रोकथाम: मैन्कोजेब 0.25% का छिड़काव

Q6. मेथी साग और दाने के बाजार भाव कैसे रहते हैं?

उत्तर:

  • मेथी साग: ₹40-60/किलो (ताजा), सर्दियों में ₹80-100/किलो तक
  • सूखी मेथी (कसूरी): ₹200-400/किलो (गुणवत्ता के अनुसार)
  • मेथी दाना: ₹80-120/किलो (सामान्य), आयुर्वेदिक गुणवत्ता वाला ₹150-200/किलो तक
  • महत्वपूर्ण: त्योहारों और शादी के मौसम में दाम 20-30% बढ़ जाते हैं

Q7. क्या मेथी की खेती के लिए सरकारी सहायता मिल सकती है?

उत्तर: हाँ, विभिन्न योजनाओं के तहत:

  1. राष्ट्रीय बागवानी मिशन: पॉलीहाउस/शेडनेट पर सब्सिडी
  2. प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना: ड्रिप/स्प्रिंकलर पर 50-80% सब्सिडी
  3. राष्ट्रीय कृषि विकास योजना: बीज, खाद पर सहायता
  4. किसान क्रेडिट कार्ड: खेती के लिए ऋण सुविधा
  5. फसल बीमा योजना: फसल नुकसान पर बीमा

Q8. मेथी की खेती में सबसे बड़ी चुनौती क्या है और उसका समाधान?

उत्तर:

  • चुनौती 1: पाउडरी मिल्ड्यू रोग
  • समाधान: समय पर छिड़काव, खेत में अतिरिक्त नमी न रखें
  • चुनौती 2: बाजार में उचित मूल्य न मिलना
  • समाधान: सीधे होटल, रेस्तरां, प्रसंस्करण इकाइयों को बेचें
  • चुनौती 3: पत्तों का जल्दी मुरझाना
  • समाधान: कटाई के तुरंत बाद ठंडी जगह पर रखें, ताजा बेचें

Q9. क्या मेथी की खेती जैविक तरीके से की जा सकती है?

उत्तर: हाँ, मेथी जैविक खेती के लिए आदर्श फसल है। जैविक मेथी के दाने और पत्तों का बाजार भाव 30-50% अधिक मिलता है। जैविक खेती के लिए:

  • जैविक खाद: गोबर खाद, वर्मीकम्पोस्ट, जीवामृत
  • जैविक कीटनाशक: नीम तेल, गौमूत्र, लहसुन का घोल
  • प्रमाणन: जैविक प्रमाणन लेकर उच्च मूल्य प्राप्त करें

Q10. मेथी से अतिरिक्त आय कैसे बढ़ाएं?

उत्तर:

  1. मूल्य संवर्धन: सूखी मेथी (कसूरी), मेथी पाउडर, मेथी टी बैग बनाएं
  2. प्रसंस्करण: अचार, मसाले, हर्बल उत्पाद बनाएं
  3. सीधी बिक्री: ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया, किसान बाजार
  4. निर्यात: जैविक मेथी दाने का निर्यात करें (यूरोप, अमेरिका में मांग)
  5. अंतरवर्ती खेती: मेथी के साथ प्याज, लहसुन, धनिया उगाएं

निष्कर्ष: कम समय, कम लागत, अधिक मुनाफा

किसान भाइयों, मेथी की खेती छोटे और सीमांत किसानों के लिए वरदान है। पूसा कसूरी जैसी उन्नत किस्म अपनाकर आप कम समय में अधिक मुनाफा कमा सकते हैं। इसकी बाजार में स्थायी मांग और ऊंचे दाम आपकी आर्थिक स्थिति सुधार सकते हैं।

आज ही शुरुआत करें:

  1. छोटे स्तर (0.5 एकड़) से प्रयोग शुरू करें
  2. उन्नत किस्म के प्रमाणित बीज खरीदें
  3. वैज्ञानिक तरीके से खेती करें
  4. बाजार शोध करके उचित मूल्य प्राप्त करें

याद रखें, आधुनिक खेती में सफलता का राज सही किस्म, सही तकनीक और सही बाजार में है। मेथी की खेती इन तीनों मापदंडों पर खरी उतरती है।

इस सीजन में मेथी की खेती को अपनाएं और अपनी आय को नया आयाम दें!

शुभकामनाओं सहित…
~ आपका कृषि सलाहकार

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