नमस्ते किसान भाइयों और बहनों,
क्या आप जानते हैं कि सही सब्जियों का संयोजन और वैज्ञानिक तरीके से खेती करके आप एक बीघा जमीन से भी 3-5 लाख रुपए तक की कमाई कर सकते हैं? जी हाँ, यह कोई अतिशयोक्ति नहीं बल्कि एक वैज्ञानिक तथ्य है। आज हम आपको दो ऐसी सब्जियों के बारे में बताएंगे जिन्हें एक साथ उगाकर आप अंतरवर्ती खेती (Intercropping) से दोगुना से भी ज्यादा मुनाफा कमा सकते हैं।

यह जादुई जोड़ी है: खीरा (Cucumber) और लोबिया (Cowpea)!
क्यों खीरा और लोबिया की जोड़ी है अद्भुत?
इन दोनों फसलों को एक साथ उगाने के कई वैज्ञानिक और आर्थिक फायदे हैं:
- तालमेल बेहतरीन: खीरा एक लता वाली फसल है जबकि लोबिया झाड़ीनुमा, दोनों एक-दूसरे के पोषक तत्वों का सदुपयोग करती हैं
- बाजार में हमेशा मांग: दोनों सब्जियों की मांग गर्मी और बरसात दोनों मौसम में रहती है
- कम समय में तैयार: खीरा 40-45 दिन में और लोबिया 50-55 दिन में तैयार
- जल्दी और लगातार उत्पादन: खीरे की 8-10 बार तुड़ाई होती है, लोबिया की 4-5 बार
- मिट्टी के लिए लाभदायक: लोबिया जड़ों में नाइट्रोजन स्थिरीकरण करके खीरे को मुफ्त में नाइट्रोजन देती है
1 बीघा (0.25 हेक्टेयर) में खीरा+लोबिया अंतरवर्ती खेती: लागत और आय विश्लेषण
(ध्यान दें: 1 बीघा = 0.25 हेक्टेयर यानि 2,500 वर्ग मीटर या लगभग 0.62 एकड़। अलग-अलग राज्यों में बीघा का आकार भिन्न हो सकता है)
| क्र.सं. | व्यय/आय का मद | विवरण | अनुमानित राशि (₹ में) |
|---|---|---|---|
| A. एक बार की लागत (पूरी फसल अवधि के लिए) | |||
| 1. | खेत तैयारी (2 जुताई, पाटा) | 3,000 | |
| 2. | खीरा बीज (उन्नत हाइब्रिड) | 1.5 किलो × ₹1200/किलो | 1,800 |
| 3. | लोबिया बीज (उन्नत किस्म) | 8 किलो × ₹80/किलो | 640 |
| 4. | बांस/तार का ट्रेलिस सिस्टम | खीरे के लिए | 8,000 |
| 5. | जैविक खाद (गोबर खाद) | 4 टन | 3,000 |
| 6. | रासायनिक उर्वरक (NPK) | संतुलित मात्रा | 4,500 |
| 7. | कीटनाशक/फफूंदनाशक | 3,500 | |
| कुल एक बार की लागत | 24,440 | ||
| B. चलने वाली लागत (पूरी फसल अवधि) | |||
| 1. | सिंचाई (ड्रिप सिस्टम) | 4,000 | |
| 2. | निराई-गुड़ाई व अन्य देखभाल | 5,000 | |
| 3. | तुड़ाई व पैकेजिंग मजदूरी | 12,000 | |
| 4. | परिवहन व विपणन | 6,000 | |
| कुल चलने वाली लागत | 27,000 | ||
| C. कुल लागत (A+B) | 51,440 | ||
| D. कुल आय (दोनों फसलों से) | |||
| 1. खीरा से आय: | |||
| – उत्पादन | 80-100 क्विंटल/बीघा (8,000-10,000 किलो) | ||
| – बाजार भाव | औसत ₹15/किलो (थोक) | ||
| – कुल आय | 9,000 किलो × ₹15 | 1,35,000 | |
| 2. लोबिया से आय: | |||
| – उत्पादन | 40-50 क्विंटल/बीघा (4,000-5,000 किलो) | ||
| – बाजार भाव | औसत ₹25/किलो (थोक) | ||
| – कुल आय | 4,500 किलो × ₹25 | 1,12,500 | |
| 3. कुल सकल आय | खीरा + लोबिया | 2,47,500 | |
| E. शुद्ध लाभ | कुल आय – कुल लागत | 2,47,500 – 51,440 | 1,96,060 |
| F. अनुमानित अतिरिक्त आय | लोबिया के बीज/दाल बेचकर | 30,000-40,000 | |
| G. कुल संभावित शुद्ध लाभ | E + F | 2.25-2.35 लाख |
नोट: यह गणना 1 बीघा (0.25 हेक्टेयर) के लिए है। यदि आप 2 बीघा में यही खेती करते हैं तो आय लगभग दोगुनी हो जाएगी। ये आंकड़े अनुकूल परिस्थितियों में हैं। स्थानीय बाजार भाव और उत्पादन क्षमता के अनुसार लाभ कम या ज्यादा हो सकता है।
खीरा और लोबिया की संयुक्त खेती का वैज्ञानिक तरीका
चरण 1: उन्नत किस्मों का चयन
- खीरा: पूसा उदय, पूसा संयोग, स्वर्ण पूर्णिमा, हाइब्रिड-708
- लोबिया: पूसा कोमल, अर्का गरिमा, पूसा फाल्गुनी, काशी कंचन
चरण 2: खेत और मिट्टी की तैयारी
- मिट्टी: बलुई दोमट, जल निकास उचित
- pH मान: 6.0-7.5
- खेत तैयारी: 2 गहरी जुताई करें, पाटा लगाकर समतल करें
- खाद: बुवाई से 15 दिन पहले 3-4 टन गोबर की सड़ी खाद प्रति बीघा
चरण 3: बुवाई का सही पैटर्न और समय
- बुवाई समय: फरवरी-मार्च (ग्रीष्म) या जून-जुलाई (खरीफ)
- पंक्ति दूरी:
- खीरा: 1.5 मीटर × 60 सेमी
- लोबिया: खीरे की दो पंक्तियों के बीच 1 पंक्ति
- बीज दर:
- खीरा: 1.5-2 किलो प्रति बीघा
- लोबिया: 8-10 किलो प्रति बीघा
- बीज उपचार: थीरम या कार्बेन्डाजिम से करें
चरण 4: ट्रेलिस सिस्टम (अनिवार्य)
- बांस के खंभे 2.5 मीटर ऊंचे गाड़ें
- खंभों के बीच तार बांधें
- खीरे की लताओं को ट्रेलिस पर चढ़ाएं
- लोबिया को नीचे ही फैलने दें
चरण 5: सिंचाई प्रबंधन
- पहली सिंचाई: बुवाई के तुरंत बाद
- बाद की सिंचाई: गर्मी में 3-4 दिन के अंतराल पर
- फूल और फल अवस्था: नमी बनाए रखें
- सर्वोत्तम: ड्रिप इरिगेशन सिस्टम लगाएं
चरण 6: उर्वरक प्रबंधन
- आधार खाद: 40:60:40 किलो NPK प्रति बीघा
- टॉप ड्रेसिंग:
- खीरा: फूल आने पर 20 किलो यूरिया
- लोबिया: अलग से नाइट्रोजन की जरूरत नहीं (स्वयं स्थिरीकरण)
चरण 7: खरपतवार नियंत्रण
- पहली निराई: बुवाई के 20-25 दिन बाद
- दूसरी निराई: 40-45 दिन बाद
- मल्चिंग: प्लास्टिक या कार्बनिक मल्च का प्रयोग करें
चरण 8: कीट एवं रोग प्रबंधन
- खीरे के मुख्य कीट: लाल भृंग, फल मक्खी, एफिड
- लोबिया के मुख्य कीट: पत्ती लपेटक, फली छेदक
- रोग: पाउडरी मिल्ड्यू, एन्थ्रेक्नोज
- जैविक नियंत्रण: नीम तेल, गौमूत्र, फेरोमोन ट्रैप
- रासायनिक: आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञ सलाह से
चरण 9: कटाई और उपज
- खीरा कटाई: बुवाई के 40-45 दिन बाद शुरू, हर 2-3 दिन में तुड़ाई
- लोबिया कटाई: 50-55 दिन बाद शुरू, हर 4-5 दिन में तुड़ाई
- कुल अवधि: 75-90 दिन (दोनों फसलें)
चरण 10: पैकेजिंग और बिक्री
- खीरा: आकार के आधार पर ग्रेडिंग, पॉलीथीन पैक
- लोबिया: ताजी फलियाँ बंडल बनाकर
- बाजार: स्थानीय मंडी, होटल, सब्जी विक्रेता, प्रोसेसिंग यूनिट
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1. खीरा और लोबिया को एक साथ क्यों उगाएं? क्या कोई वैज्ञानिक कारण है?
उत्तर: हाँ, कई वैज्ञानिक कारण हैं:
- नाइट्रोजन स्थिरीकरण: लोबिया जड़ों में राइजोबियम जीवाणु के सहयोग से वायुमंडलीय नाइट्रोजन स्थिर करती है, जिसका लाभ खीरे को मिलता है
- स्थान का कुशल उपयोग: खीरा ऊपर ट्रेलिस पर, लोबिया नीचे जमीन पर
- कीट-रोग नियंत्रण: दोनों फसलों के कीट अलग-अलग होते हैं, इसलिए एक फसल दूसरे की रक्षा करती है
- मिट्टी स्वास्थ्य: लोबिया मिट्टी की उर्वरता बढ़ाती है
Q2. एक बीघा से वाकई 2 लाख रुपए से ज्यादा कमाई हो सकती है?
उत्तर: हाँ, बिल्कुल! यदि आप:
- उन्नत किस्म के बीज प्रयोग करें
- ट्रेलिस सिस्टम अपनाएं
- नियमित सिंचाई और देखभाल करें
- बाजार में सही समय पर बेचें
तो 1.75 से 2.25 लाख रुपए तक का शुद्ध लाभ संभव है। कई प्रगतिशील किसान इससे भी अधिक कमा रहे हैं।
Q3. ट्रेलिस सिस्टम क्या है और क्यों जरूरी है?
उत्तर: ट्रेलिस एक ऐसी संरचना है जिस पर खीरे की लताएं चढ़ती हैं। इसके लाभ:
- उपज 30-40% बढ़ जाती है
- फलों की गुणवत्ता बेहतर (सीधे धूप और हवा मिलती है)
- तुड़ाई आसान होती है
- रोग कम लगते (फल जमीन को नहीं छूते)
- लोबिया के लिए नीचे जगह बचती है
Q4. बीज कहाँ से मिलेंगे और कौन सी किस्में सर्वोत्तम हैं?
उत्तर:
- बीज स्रोत: राज्य बीज निगम, NSC, IARI, प्रमाणित बीज विक्रेता
- खीरे की सर्वोत्तम किस्में: पूसा उदय (गर्मी के लिए), पूसा संयोग (बरसात के लिए)
- लोबिया की सर्वोत्तम किस्में: अर्का गरिमा (हरी फली), पूसा कोमल (ताजा उपभोग)
- बीज मूल्य: खीरा हाइब्रिड ₹1000-1500/किलो, लोबिया ₹70-100/किलो
Q5. क्या इन फसलों को गर्मी और बरसात दोनों में उगा सकते हैं?
उत्तर: हाँ, दोनों मौसमों के लिए उपयुक्त:
- ग्रीष्म फसल (फरवरी-मार्च बुवाई): सिंचाई का विशेष ध्यान रखें
- खरीफ फसल (जून-जुलाई बुवाई): जल निकास का ध्यान रखें
- रबी फसल (अक्टूबर-नवंबर): केवल दक्षिण भारत में संभव
Q6. मुख्य कीट और रोग कौन से हैं और उनका प्रबंधन कैसे करें?
उत्तर:
खीरे के मुख्य कीट:
- फल मक्खी: येलो स्टिकी ट्रैप और नीम आधारित कीटनाशक
- एफिड: इमिडाक्लोप्रिड (विशेषज्ञ सलाह से)
- पाउडरी मिल्ड्यू: घुलनशील गंधक का छिड़काव
लोबिया के मुख्य कीट:
- पत्ती लपेटक: क्विनलफॉस या नीम तेल
- फली छेदक: फेरोमोन ट्रैप @ 5 प्रति बीघा
- थ्रिप्स: डाईमिथोएट का छिड़काव
Q7. तुड़ाई के बाद फसल को कैसे संरक्षित रखें?
उत्तर:
- खीरा: तुरंत ठंडी जगह पर रखें, 10-12°C तापमान पर 7-10 दिन तक रख सकते हैं
- लोबिया: नम पॉलीथीन में लपेटकर, 5-7 दिन तक ताजा रख सकते हैं
- बेहतर: तुड़ाई के 4-6 घंटे के भीतर बाजार पहुँचा दें
Q8. बाजार कहाँ मिलेगा? क्या दोनों सब्जियों की मांग रहती है?
उत्तर: दोनों की मांग स्थायी है:
- खीरा: सलाद, रायता, जूस, अचार, कॉस्मेटिक उद्योग
- लोबिया: सब्जी, दाल, स्प्राउट्स, पशु आहार
- बाजार: स्थानीय मंडी, सब्जी भंडार, होटल, कैटरिंग, प्रोसेसिंग यूनिट, निर्यात
Q9. क्या सरकारी सहायता या सब्सिडी मिल सकती है?
उत्तर: हाँ, विभिन्न योजनाओं के तहत:
- ड्रिप इरिगेशन सिस्टम: 50-80% सब्सिडी (प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना)
- बीज सब्सिडी: राज्य सरकारों द्वारा प्रमाणित बीज पर 30-50%
- ट्रेलिस सहायता: कुछ राज्यों में बांस/तार पर सब्सिडी
- प्रशिक्षण: कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) द्वारा निःशुल्क प्रशिक्षण
Q10. शुरुआत कैसे करें? कोई विशेष सलाह?
उत्तर:
- छोटे स्तर से शुरू करें: पहले 0.5 बीघा में प्रयोग करें
- प्रशिक्षण लें: नजदीकी KVK या कृषि विश्वविद्यालय से
- बाजार शोध: पहले से खरीदार ढूंढ लें
- वित्तीय योजना: किसान क्रेडिट कार्ड या बैंक ऋण लें
- बीमा कराएं: फसल बीमा अवश्य कराएं
निष्कर्ष: दो फसलों का जादू, एक बीघा में खुशहाली
किसान भाइयों, खीरा और लोबिया की यह जोड़ी वास्तव में “1+1=11” के सिद्धांत पर काम करती है। यह अंतरवर्ती खेती का ऐसा सफल मॉडल है जो छोटे और सीमांत किसानों को भी समृद्ध बना सकता है।
याद रखें: सफलता के तीन मंत्र हैं:
- वैज्ञानिक ज्ञान – सही तकनीक अपनाएं
- समर्पण – नियमित देखभाल करें
- बाजार कौशल – सही समय पर सही कीमत पर बेचें
इस सीजन में इस जादुई जोड़ी को अपनाएं और अपनी आय को नया आयाम दें। जब आपके पास नोट गिनने के लिए मशीन खरीदनी पड़े, तो हमें जरूर याद करें!
आपकी समृद्धि और सफलता की कामनाओं के साथ…
~ आपका कृषि मित्र
अनुभव साझा करें: यदि आप पहले से ही इस तरह की अंतरवर्ती खेती कर रहे हैं, तो कृपया अपने अनुभव नीचे कमेंट में साझा करें। आपका अनुभव अन्य किसानों के लिए मार्गदर्शन करेगा।