जनवरी में गेहूं बुवाई – अभी भी समय है!
जनवरी में गेहूं की बुवाई के लिए विशेष पछेती किस्में उपलब्ध हैं जो कम समय में अधिक उपज देती हैं। इन किस्मों का विकास विलंब से बुवाई के लिए किया गया है और ये 75-90 दिन में तैयार हो जाती हैं।

शीर्ष 5 पछेती गेहूं किस्में (जनवरी के लिए)
1. DBW 187 (पूसा तेजस)
विशेषताएं:
- बुवाई समय: जनवरी का अंत तक
- पकने की अवधि: 110-115 दिन
- उत्पादन क्षमता: 75-81 क्विंटल/हेक्टेयर
- प्रतिरोधकता: भूरी वर्णिका रोग प्रतिरोधी
- बीज दर: 40-45 किलो प्रति एकड़
- भूमि: सभी प्रकार की भूमि के लिए उपयुक्त
2. HD 3249 (पूसा उजाला)
विशेषताएं:
- बुवाई समय: 15 जनवरी तक
- पकने की अवधि: 105-110 दिन
- उत्पादन: 70-76 क्विंटल/हेक्टेयर
- विशेषता: उच्च प्रोटीन (12-13%)
- जल आवश्यकता: कम
- रोग प्रतिरोध: करनाल बंट प्रतिरोधी
3. WH 1270 (पूसा यशस्वी)
विशेषताएं:
- बुवाई समय: जनवरी का पहला पखवाड़ा
- पकने की अवधि: 100-105 दिन
- उत्पादन: 68-72 क्विंटल/हेक्टेयर
- गुणवत्ता: चपाती के लिए उत्तम
- अनुकूलता: सिंचित और असिंचित दोनों
4. PBW 752 (पंजाब स्पेशल)
विशेषताएं:
- बुवाई समय: 20 जनवरी तक
- पकने की अवधि: 115-120 दिन
- उत्पादन: 72-78 क्विंटल/हेक्टेयर
- विशेषता: झुलसा रोग प्रतिरोधी
- क्षेत्र: पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी UP के लिए
5. HD 3117 (पूसा प्रगति)
विशेषताएं:
- बुवाई समय: 25 जनवरी तक
- पकने की अवधि: 95-100 दिन
- उत्पादन: 65-70 क्विंटल/हेक्टेयर
- सबसे तेज: न्यूनतम समय में तैयार
- बीज दर: 45-50 किलो/एकड़
किस्मों का क्षेत्रवार चयन
उत्तर भारत के लिए:
- पंजाब/हरियाणा: PBW 752, DBW 187
- उत्तर प्रदेश: HD 3249, WH 1270
- राजस्थान: DBW 187, HD 3117
- मध्य प्रदेश: HD 3249, WH 1270
पूर्वी भारत के लिए:
- बिहार/झारखंड: DBW 187
- पश्चिम बंगाल: HD 3249
- असम: WH 1270 (कम तापमान सहनशील)
विस्तृत खेती गाइड (जनवरी बुवाई विशेष)
चरण 1: त्वरित भूमि तैयारी
जनवरी में विशेष टिप्स:
- एक बार गहरी जुताई पर्याप्त
- तुरंत पाटा लगाएं
- नमी बनाए रखें
- देरी न करें – समय कीमती है
चरण 2: बीज उपचार
अनिवार्य उपचार:
- फफूंदनाशी: कार्बेन्डाजिम 2g/kg बीज
- कीटनाशी: इमिडाक्लोप्रिड 5ml/kg बीज
- बायो एजेंट: ट्राइकोडर्मा 5g/kg बीज
जनवरी विशेष: बीज को 12 घंटे पानी में भिगोकर सुखाएं
चरण 3: बुवाई का तरीका
जनवरी में घनत्व बढ़ाएं:
- पंक्ति से पंक्ति दूरी: 18-20 सेमी (सामान्य: 22-23 सेमी)
- बीज गहराई: 4-5 सेमी
- बीज दर:
- DBW 187: 45 किलो/एकड़
- HD 3117: 50 किलो/एकड़
- अन्य: 40-45 किलो/एकड़
विधि: सीड ड्रिल से बुवाई सर्वोत्तम
चरण 4: उर्वरक प्रबंधन
जनवरी बुवाई के लिए विशेष:
- नाइट्रोजन: 120 किलो/हेक्टेयर (तीन भागों में)
- पहला: बुवाई के समय
- दूसरा: पहली सिंचाई (20-25 दिन)
- तीसरा: दूसरी सिंचाई (45-50 दिन)
- फॉस्फोरस: 60 किलो/हेक्टेयर (बुवाई के समय)
- पोटाश: 40 किलो/हेक्टेयर
- जिंक: 25 किलो जिंक सल्फेट/हेक्टेयर
चरण 5: सिंचाई प्रबंधन
जनवरी बुवाई के लिए कम सिंचाई:
- पहली सिंचाई: 20-25 दिन बाद (क्राउन रूट)
- दूसरी: 45-50 दिन बाद (फूल आने से पहले)
- तीसरी: 70-75 दिन बाद (दाना भरते समय)
- चौथी: 90-95 दिन बाद (यदि आवश्यक हो)
टिप: हल्की सिंचाई करें, जलभराव न होने दें
चरण 6: खरपतवार नियंत्रण
जनवरी में त्वरित नियंत्रण:
- पहली निराई: 20-25 दिन बाद
- दूसरी निराई: 40-45 दिन बाद
- रासायनिक: सल्फोसल्फ्यूरॉन 25g/एकड़
- हाथ से निराई: अधिक प्रभावी
जनवरी बुवाई के विशेष लाभ
1. कीट-रोग कम:
- कम तापमान में कीट कम सक्रिय
- रोग का प्रकोप कम
- फसल स्वस्थ रहती है
2. जल बचत:
- वाष्पीकरण कम
- सिंचाई की कम आवश्यकता
- नमी लंबे समय तक बनी रहती है
3. श्रम उपलब्धता:
- रबी फसलों की कटाई के बाद
- मजदूर आसानी से मिलते हैं
- श्रम लागत कम
4. बाजार लाभ:
- गर्मियों में कटाई
- भंडारण के लिए उपयुक्त
- बेहतर भाव मिलने की संभावना
उत्पादन और आर्थिक लाभ
उपज विवरण:
| किस्म | उत्पादन (क्विंटल/हेक्टेयर) | उत्पादन (क्विंटल/एकड़) |
|---|---|---|
| DBW 187 | 75-81 | 30-33 |
| HD 3249 | 70-76 | 28-31 |
| PBW 752 | 72-78 | 29-32 |
| WH 1270 | 68-72 | 27-29 |
| HD 3117 | 65-70 | 26-28 |
आर्थिक विश्लेषण (प्रति एकड़):
| विवरण | राशि (₹) |
|---|---|
| बीज लागत | 1,500-2,000 |
| उर्वरक | 3,000-4,000 |
| सिंचाई | 1,500-2,000 |
| श्रम | 2,000-3,000 |
| कटाई-गहाई | 3,000-4,000 |
| कुल लागत | ₹10,000-15,000 |
| उपज (30 क्विंटल) | |
| भाव (₹2,200/क्विंटल) | ₹66,000 |
| शुद्ध लाभ | ₹51,000-56,000 |
रोग एवं कीट प्रबंधन
जनवरी बुवाई में विशेष सावधानियाँ:
- झुलसा रोग:
- प्रबंधन: प्रोपिकोनाजोल 1ml/लीटर
- रोकथाम: रोग रोधी किस्में लगाएं
- करनाल बंट:
- प्रबंधन: टेबुकोनाजोल 1ml/लीटर
- बीज उपचार जरूरी
- दीमक:
- प्रबंधन: क्लोरपाइरीफॉस बुवाई के समय
समेकित कीट प्रबंधन:
- नीम आधारित कीटनाशक
- फेरोमोन ट्रैप
- जैविक नियंत्रण
सफल किसानों के अनुभव
उत्तर प्रदेश: किसान राजेश वर्मा
“मैंने 20 जनवरी को DBW 187 लगाया। 112 दिन में फसल तैयार हुई। उपज 32 क्विंटल/एकड़ मिली। पछेती किस्म होने के बावजूद उपज अच्छी रही।”
मध्य प्रदेश: महिला किसान समूह
“हमने 15 जनवरी को HD 3249 लगाई। प्राकृतिक खेती की। 28 क्विंटल/एकड़ उपज मिली। लागत कम और लाभ अच्छा मिला।”
सरकारी सहायता
पछेती बुवाई के लिए विशेष:
- बीज सब्सिडी: 50% तक
- सूक्ष्म सिंचाई: 90% अनुदान
- कृषि यंत्र: सीड ड्रिल किराए पर
समय पर बीज उपलब्धता:
- राज्य बीज निगम
- कृषि विज्ञान केंद्र (KVK)
- निजी बीज कंपनियाँ
निष्कर्ष और सिफारिशें
जनवरी बुवाई के लिए अंतिम सलाह:
- शीघ्र निर्णय लें: जनवरी के पहले पखवाड़े में बुवाई पूरी करें
- सही किस्म चुनें: DBW 187 या HD 3249 प्राथमिकता दें
- बीज दर बढ़ाएं: सामान्य से 10-15% अधिक बीज प्रयोग करें
- उर्वरक प्रबंधन: नाइट्रोजन को विभाजित करके दें
- जल प्रबंधन: हल्की लेकिन नियमित सिंचाई करें
सावधानियाँ:
- जलभराव से बचें
- समय पर निराई करें
- रोग नियंत्रण पर ध्यान दें
- फसल परिपक्वता का निरीक्षण करें
आशावादी तथ्य:
“जनवरी में गेहूं की बुवाई करने वाले किसान अभी भी 30-33 क्विंटल प्रति एकड़ उपज प्राप्त कर सकते हैं। सही किस्म, सही प्रबंधन और सही समय पर कार्य करके आप नुकसान की भरपाई कर सकते हैं।”
याद रखें: पछेती किस्मों का चुनाव, उचित प्रबंधन और समय पर कार्य ही सफलता की कुंजी है। जनवरी का महीना अभी भी गेहूं बुवाई के लिए उपयुक्त है, बशर्ते आप सही किस्म का चयन करें।