धान रोपाई में अब 3 हजार में पूरा काम! ₹5000 बचाएं, मजदूरों की छुट्टी, इस मशीन ने बदला खेती का गणित

क्या आप जानते हैं कि धान की पारंपरिक रोपाई में सिर्फ एक एकड़ पर ही मजदूरी का 5,000 से 8,000 रुपये तक का खर्च आ जाता है? लेकिन अब एक ऐसी मशीन आ गई है जो न सिर्फ यह काम महज 2,500 से 3,000 रुपये में कर देगी, बल्कि समय की भारी बचत भी कराएगी। बिहार के पूर्णिया जिले के प्रगतिशील किसान रवि कुमार ने इस मशीन से अपने 5 एकड़ खेत की रोपाई करके सिर्फ 15,000 रुपये में काम पूरा किया, जबकि पारंपरिक तरीके से यह काम कम से कम 35,000 रुपये में पड़ता। आइए जानते हैं इस क्रांतिकारी मशीन के बारे में जो धान की रोपाई का पूरा गेम बदल रही है।

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यह कौन सी मशीन है? “राइस ट्रांसप्लांटर” (धान रोपाई मशीन)

राइस ट्रांसप्लांटर एक ऐसी मशीन है जो धान की नर्सरी से पौधे उखाड़कर, उन्हें खेत में एक समान दूरी और गहराई पर लगाती है। यह दो प्रकार की होती है: मैनुअल (हाथ से चलने वाली) और मोटराइज्ड (ट्रैक्टर से चलने वाली)। यह मशीन उन किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है जिन्हें रोपाई के समय मजदूरों की कमी या उनकी ऊंची मजदूरी की वजह से परेशानी होती है।

₹5,000 बचत का पूरा गणित: पैसे-पैसे का हिसाब

आइए, एक एकड़ के हिसाब से पारंपरिक तरीके और मशीनी तरीके की लागत की तुलना करें:

पारंपरिक तरीका (मजदूरों से रोपाई):

  • मजदूरों की संख्या: 8-10 व्यक्ति प्रति एकड़
  • मजदूरी: ₹300-₹400 प्रति व्यक्ति प्रतिदिन (राज्य के अनुसार भिन्न)
  • समय: 1 एकड़ की रोपाई में 8-10 मजदूरों को लगभग 1 दिन लगता है
  • कुल लागत: ₹300 x 10 व्यक्ति = ₹3,000 (कम से कम) से लेकर ₹4,000-₹5,000 तक

मशीनी तरीका (राइस ट्रांसप्लांटर से रोपाई):

  • मशीन किराया: ₹2,500 से ₹3,000 प्रति एकड़ (क्षेत्र और मशीन के प्रकार के अनुसार)
  • समय: महज 1-2 घंटे में एक एकड़ की रोपाई पूरी
  • ईंधन/अतिरिक्त लागत: लगभग ₹200-₹300
  • कुल लागत: ₹2,500 से ₹3,300 प्रति एकड़

कुल बचत:

पारंपरिक लागत (₹4,000) – मशीनी लागत (₹3,000) = ₹1,000 प्रति एकड़ की सीधी बचत।

परंतु, असली बचत इससे भी अधिक है! क्योंकि मशीन से रोपाई होने पर:

  1. बीज की बचत: मशीन निश्चित दूरी पर पौधे लगाती है, इसलिए बीज का अपव्यय कम होता है। लगभग 20-30% बीज बचता है (लगभग ₹500-₹700 की बचत)।
  2. खाद और पानी की बचत: एक समान दूरी पर पौधे लगने से हर पौधे को समान पोषण मिलता है, खाद का सदुपयोग होता है।
  3. समय की बचत: समय पर रोपाई से फसल अच्छी होती है, जिससे उपज बढ़ती है।

कुल मिलाकर, प्रति एकड़ ₹4,000 से ₹5,000 तक की समग्र बचत संभव है!

राइस ट्रांसप्लांटर के फायदे: सिर्फ पैसे की बचत ही नहीं

  1. समय की भारी बचत: जहाँ 10 मजदूर एक एकड़ की रोपाई में पूरा दिन लगाते हैं, वहीं एक मशीन 1-2 घंटे में काम पूरा कर देती है।
  2. एकसमान रोपाई: मशीन पौधों को सटीक दूरी (आमतौर पर 20cm x 10cm या 30cm x 10cm) पर लगाती है, जिससे हर पौधे को धूप, हवा और पोषक तत्व समान मिलते हैं।
  3. उपज में वृद्धि: वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि मशीन से रोपाई करने पर उपज में 10-15% तक की बढ़ोतरी हो सकती है क्योंकि पौधों की संख्या नियंत्रित रहती है।
  4. श्रमिक संकट से मुक्ति: रोपाई के समय मजदूर न मिलने की समस्या से निजात मिलती है।
  5. स्वास्थ्य लाभ: किसानों और मजदूरों को घंटों पानी में झुककर काम करने से होने वाली पीठ और कमर दर्द की समस्या से छुटकारा।

मशीन की कीमत और उपलब्धता

  1. मैनुअल राइस ट्रांसप्लांटर: इसकी कीमत ₹20,000 से ₹40,000 के बीच होती है। यह छोटे और मध्यम किसानों के लिए आदर्श है।
  2. मोटराइज्ड राइस ट्रांसप्लांटर (ट्रैक्टर माउंटेड): इसकी कीमत ₹1,00,000 से ₹3,00,000 तक हो सकती है। यह बड़े किसानों या कस्टम हायरिंग सेवा देने वालों के लिए उपयुक्त है।
  3. किराए पर उपलब्धि: ज्यादातर क्षेत्रों में ये मशीनें ₹2,500 से ₹3,500 प्रति एकड़ के किराए पर उपलब्ध हैं। कई राज्य सरकारों की कृषि यंत्रीकरण उप-मिशन योजना के तहत इन मशीनों पर 50% तक का अनुदान भी मिलता है।

किसान रवि कुमार का अनुभव:

“पहले रोपाई के दिनों में मजदूरों के पीछे भागना, उनकी मजदूरी के झगड़े, और फिर भी काम समय पर न होना… यह सब खत्म हो गया है। मैंने पिछले साल एक मोटराइज्ड ट्रांसप्लांटर ₹2,800 प्रति एकड़ के किराए पर लिया। मेरे 5 एकड़ की रोपाई सुबह 9 से दोपहर 3 बजे तक में ही पूरी हो गई। कुल खर्चा ₹14,000 आया। पहले यही काम कम से कम ₹20,000 में पड़ता था। साथ ही, इस बार फसल भी ज्यादा अच्छी हुई है क्योंकि पौधे एक समान लगे हैं।”

निष्कर्ष: अब समय है आधुनिक तकनीक अपनाने का

धान रोपाई की यह मशीन किसानों की आर्थिक और शारीरिक दोनों समस्याओं का समाधान है। यह न सिर्फ लागत कम करती है, बल्कि उत्पादकता बढ़ाकर आमदनी भी बढ़ाती है। अगर आप छोटे किसान हैं, तो सहकारी समिति या स्वयं सहायता समूह के माध्यम से मिल-जुलकर मशीन खरीद सकते हैं, या किराए पर ले सकते हैं।

अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) या कृषि विभाग के अधिकारी से संपर्क करें। वे आपको मशीन की उपलब्धता, किराया दर और अनुदान की पूरी जानकारी देंगे। कई जिलों में किसानों को प्रशिक्षण भी दिया जाता है।

यह मशीन सिर्फ धान रोपाई का तरीका नहीं बदल रही, बल्कि किसानों की जिंदगी बदल रही है। आप कब इसका फायदा उठाना शुरू करेंगे?

क्या आपने भी राइस ट्रांसप्लांटर का इस्तेमाल किया है? अपना अनुभव कमेंट में जरूर बताएं। इस जानकारी को अन्य किसान भाइयों तक शेयर करें ताकि वे भी इस आधुनिक तकनीक का लाभ उठा सकें।

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