आलू भारत की सबसे महत्वपूर्ण नकदी फसलों में से एक है। सब्ज़ी, चिप्स, फ्रेंच फ्राइज़, स्टार्च और प्रोसेसिंग उद्योग में इसकी भारी मांग रहती है। सही तकनीक अपनाकर किसान कम लागत में अधिक उत्पादन लेकर अच्छा मुनाफ़ा कमा सकते हैं।
नीचे आपको आलू की खेती की पूरी प्रक्रिया स्टेप-बाय-स्टेप, उन्नत किस्में, खाद-सिंचाई प्रबंधन, रोग-कीट नियंत्रण और अंत में महत्वपूर्ण FAQ दिए गए हैं।
उपयुक्त जलवायु और मिट्टी

जलवायु
- आलू ठंडी जलवायु की फसल है।
- 15°C – 25°C तापमान सर्वोत्तम रहता है।
- अधिक गर्मी में कंद (tuber) का विकास कम होता है।
मिट्टी
- बलुई दोमट या दोमट मिट्टी सर्वोत्तम।
- pH मान 5.5 – 6.5 उपयुक्त।
- जल निकास अच्छा होना चाहिए।
उन्नत किस्मों का चयन
| किस्म | पकने की अवधि | विशेषता |
|---|---|---|
| कुफरी बादशाह | 90–100 दिन | अधिक उत्पादन |
| कुफरी पुखराज | 70–90 दिन | जल्दी तैयार |
| कुफरी ज्योति | 90–110 दिन | रोग प्रतिरोधी |
| कुफरी चिप्सोना | 100–110 दिन | चिप्स के लिए उपयुक्त |
👉 अपने क्षेत्र की कृषि विभाग से सलाह लेकर किस्म चुनें।
खेत की तैयारी



जुताई
- 2–3 बार गहरी जुताई करें।
- मिट्टी भुरभुरी बनाएं।
खाद मिलाना
- 20–25 टन सड़ी हुई गोबर की खाद प्रति हेक्टेयर मिलाएं।
मेढ़ (Ridge) बनाना
- 60–70 सेमी दूरी पर मेढ़ बनाएं।
- कंदों को मेढ़ पर लगाया जाता है।
बीज का चयन और उपचार



बीज चयन
- 25–50 ग्राम वजन के स्वस्थ कंद चुनें।
- अंकुरित बीज बेहतर उत्पादन देते हैं।
बीज उपचार
- फफूंदनाशक (कार्बेन्डाजिम) से उपचार करें।
- इससे रोग कम लगते हैं।
बुवाई की विधि
- बुवाई का समय:
- उत्तर भारत: अक्टूबर–नवंबर
- पहाड़ी क्षेत्र: फरवरी–मार्च
दूरी
- कतार से कतार: 60–70 सेमी
- पौधे से पौधे: 20–25 सेमी
- गहराई: 5–7 सेमी
👉 बुवाई के बाद हल्की सिंचाई करें।
सिंचाई प्रबंधन
- पहली सिंचाई बुवाई के तुरंत बाद।
- 7–10 दिन के अंतराल पर सिंचाई करें।
- जलभराव से बचें।
- ड्रिप सिंचाई से पानी की बचत होती है।
खरपतवार नियंत्रण
- बुवाई के 20–25 दिन बाद पहली गुड़ाई।
- मिट्टी चढ़ाना (Earthing up) आवश्यक।
- आवश्यकता हो तो खरपतवारनाशक का प्रयोग।
रोग और कीट नियंत्रण
झुलसा रोग (Late Blight)
- पत्तियों पर भूरे धब्बे।
- नियंत्रण: मैनकोजेब का छिड़काव।
प्रारंभिक झुलसा (Early Blight)
- गोल धब्बे दिखाई देते हैं।
माहू (Aphids)
- रस चूसते हैं।
- नियंत्रण: कीटनाशक छिड़काव।
खुदाई और उत्पादन
- फसल 90–110 दिन में तैयार।
- पत्तियां सूखने लगें तो खुदाई करें।
- औसत उत्पादन: 250–350 क्विंटल प्रति हेक्टेयर।
- खुदाई के बाद छाया में सुखाएं।
आलू की खेती में लागत और लाभ
| खर्च (प्रति हेक्टेयर) | अनुमानित राशि |
|---|---|
| बीज | ₹40,000–60,000 |
| खाद व उर्वरक | ₹20,000 |
| सिंचाई | ₹10,000 |
| मजदूरी | ₹25,000 |
| कुल लागत | ₹1–1.2 लाख |
FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1️⃣ आलू की खेती के लिए सबसे अच्छा महीना कौन सा है?
उत्तर भारत में अक्टूबर–नवंबर सबसे उपयुक्त समय है।
2️⃣ आलू की खेती में कितने दिन लगते हैं?
70–110 दिन में फसल तैयार हो जाती है।
3️⃣ प्रति एकड़ कितना उत्पादन होता है?
औसतन 100–140 क्विंटल प्रति एकड़।
4️⃣ कौन सी किस्म सबसे अधिक उत्पादन देती है?
कुफरी बादशाह और कुफरी पुखराज अच्छी उपज देती हैं।
5️⃣ आलू में सबसे खतरनाक रोग कौन सा है?
झुलसा रोग (Late Blight) सबसे खतरनाक है।
6️⃣ क्या ड्रिप सिंचाई लाभदायक है?
हाँ, इससे पानी की बचत और उत्पादन दोनों बढ़ते हैं।
निष्कर्ष
आलू की खेती सही तकनीक और समय पर प्रबंधन से अत्यंत लाभकारी साबित हो सकती है। यदि किसान उन्नत किस्म, संतुलित खाद, समय पर सिंचाई और रोग नियंत्रण अपनाएं, तो कम लागत में अधिक उत्पादन संभव है।