लहसुन (Allium sativum) भारत की प्रमुख मसाला एवं औषधीय फसलों में से एक है। यह न केवल रसोई का महत्वपूर्ण हिस्सा है, बल्कि आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा में भी इसका व्यापक उपयोग होता है। बढ़ती मांग, बेहतर बाजार भाव और लंबे समय तक भंडारण की क्षमता के कारण लहसुन की खेती किसानों के लिए लाभदायक व्यवसाय बनती जा रही है।
आज के समय में पारंपरिक खेती के साथ-साथ टावर (Vertical Farming) और एरोपोनिक (Aeroponic) तकनीक से भी लहसुन उगाया जा रहा है।
पारंपरिक विधि से लहसुन की खेती (Step by Step)
1. जलवायु और मिट्टी

- तापमान: 12°C – 25°C
- मिट्टी: दोमट या बलुई दोमट
- pH स्तर: 6.0 – 7.5
- जल निकास: अच्छा होना चाहिए
2. भूमि की तैयारी
- 2–3 गहरी जुताई करें
- 8–10 टन सड़ी गोबर खाद प्रति एकड़ मिलाएं
- खेत समतल रखें
- क्यारियाँ (बेड) 1–1.5 मीटर चौड़ी बनाएं
3. बीज (कलियों) का चयन
- स्वस्थ और बड़े आकार की कलियां चुनें
- 1 एकड़ के लिए 5–6 क्विंटल बीज
- बुवाई से पहले फफूंदनाशक (कार्बेन्डाजिम) से उपचार
4. बुवाई का समय और दूरी
- समय: अक्टूबर–नवंबर
- कतार दूरी: 15 सेमी
- पौधा दूरी: 7–10 सेमी
- गहराई: 3–5 सेमी
5. सिंचाई प्रबंधन
- पहली सिंचाई बुवाई के तुरंत बाद
- 10–15 दिन के अंतराल पर
- जलभराव से बचें
6. खाद एवं उर्वरक प्रबंधन
| उर्वरक | मात्रा (प्रति एकड़) |
|---|---|
| नाइट्रोजन | 50–60 किग्रा |
| फॉस्फोरस | 25–30 किग्रा |
| पोटाश | 25–30 किग्रा |
नाइट्रोजन 2–3 किस्तों में दें।
7. खरपतवार नियंत्रण
- 20–25 दिन बाद पहली निराई
- 2–3 बार गुड़ाई आवश्यक
8. रोग एवं कीट नियंत्रण
- पर्पल ब्लॉच
- डाउनी मिल्ड्यू
- थ्रिप्स कीट
समय पर फफूंदनाशक एवं कीटनाशक का प्रयोग करें।
9. खुदाई और कटाई
- 120–150 दिन में फसल तैयार
- पत्तियां पीली होने लगें तो खुदाई करें
- 4–5 दिन धूप में सुखाएं
उत्पादन और लाभ
- उत्पादन: 50–70 क्विंटल/एकड़
- औसत भाव: ₹2000–₹6000 प्रति क्विंटल
- कुल आय: ₹1.5–3 लाख/एकड़
टावर (Vertical Farming) विधि से लहसुन की खेती
आज शहरी खेती और कम जमीन में अधिक उत्पादन के लिए टावर फार्मिंग लोकप्रिय हो रही है।
टावर फार्मिंग क्या है?


इस विधि में पौधों को ऊंचाई में कई स्तरों पर उगाया जाता है। पानी और पोषक तत्व पाइप सिस्टम द्वारा दिए जाते हैं।
टावर विधि – Step by Step
संरचना तैयार करें
- PVC पाइप या प्लास्टिक टावर
- 4–6 फीट ऊंचाई
- हर टावर में 20–40 पौधे
ग्रोइंग मीडिया
- कोकोपीट
- परलाइट
- वर्मी कम्पोस्ट
3️⃣ पोषक घोल
- NPK सॉल्यूशन
- माइक्रोन्यूट्रिएंट मिश्रण
सिंचाई
- ड्रिप या सर्कुलेशन सिस्टम
फायदे
- कम जगह में अधिक उत्पादन
- 30–40% पानी की बचत
- शहरी क्षेत्रों के लिए उपयुक्त
- कीट कम लगते हैं
लागत और उत्पादन
| विवरण | अनुमान |
|---|---|
| सेटअप लागत | ₹50,000–₹2 लाख |
| उत्पादन | 25–40% अधिक |
| फसल अवधि | 100–120 दिन |
एरोपोनिक विधि से लहसुन की खेती
🌫️ एरोपोनिक खेती क्या है?



एरोपोनिक में पौधों की जड़ें हवा में लटकती हैं और उन पर पोषक तत्वों का स्प्रे किया जाता है। इसमें मिट्टी का उपयोग नहीं होता।
एरोपोनिक विधि – Step by Step
1️⃣ संरचना निर्माण
- ग्रीनहाउस या नियंत्रित कमरा
- मिस्टिंग सिस्टम
2️⃣ पौध रोपण
- नेट पॉट में कली रखें
- जड़ें हवा में रहें
3️⃣ पोषक तत्व स्प्रे
- हर 5–10 मिनट में स्प्रे
- संतुलित NPK
4️⃣ तापमान नियंत्रण
- 18–22°C आदर्श
फायदे
- 90% तक पानी की बचत
- 40–60% अधिक उत्पादन
- तेजी से वृद्धि
- कम रोग
लागत
| विवरण | अनुमान |
|---|---|
| प्रारंभिक लागत | ₹3–8 लाख |
| उत्पादन वृद्धि | 50% तक |
| फसल अवधि | 90–110 दिन |
तुलना तालिका
| विधि | लागत | पानी की बचत | उत्पादन |
|---|---|---|---|
| पारंपरिक | कम | सामान्य | 50–70 क्विंटल |
| टावर | मध्यम | 30–40% | 25–40% अधिक |
| एरोपोनिक | अधिक | 80–90% | 40–60% अधिक |
लहसुन खेती के लाभ
- सालभर मांग
- भंडारण योग्य
- निर्यात की संभावना
- औषधीय उपयोग
FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1️⃣ लहसुन की बुवाई का सही समय क्या है?
अक्टूबर–नवंबर सबसे उपयुक्त समय है।
2️⃣ टावर खेती में क्या लाभ है?
कम जगह में अधिक उत्पादन और पानी की बचत।
3️⃣ एरोपोनिक खेती में मिट्टी की जरूरत होती है?
नहीं, इसमें जड़ें हवा में रहती हैं।
4️⃣ 1 एकड़ में कितना उत्पादन होता है?
50–70 क्विंटल (पारंपरिक विधि)।
5️⃣ क्या एरोपोनिक खेती लाभदायक है?
हाँ, लेकिन प्रारंभिक लागत अधिक है।
निष्कर्ष
लहसुन की खेती पारंपरिक, टावर और एरोपोनिक तीनों तरीकों से की जा सकती है। छोटे किसान पारंपरिक विधि से शुरुआत कर सकते हैं, जबकि शहरी और प्रगतिशील किसान टावर या एरोपोनिक तकनीक अपनाकर अधिक लाभ कमा सकते हैं।