तोरी (तुरई) की खेती कैसे करें – स्टेप बाय स्टेप पूरी जानकारी

तोरी (जिसे कई जगह तुरई / रिज गार्ड / स्पंज गार्ड भी कहा जाता है) एक लोकप्रिय सब्जी फसल है। इसकी खेती कम समय में अच्छी पैदावार देती है और बाजार में हमेशा मांग रहती है। यदि आप सब्जी की खेती से अच्छा मुनाफा कमाना चाहते हैं, तो तोरी की खेती एक बेहतरीन विकल्प है।

उपयुक्त जलवायु और मौसम

तोरी (तुरई) की खेती कैसे करें
तोरी (तुरई) की खेती कैसे करें
तोरी (तुरई) की खेती कैसे करें
तोरी  की खेती कैसे करें
  • तोरी गर्म जलवायु की फसल है।
  • तापमान: 20°C से 35°C उपयुक्त
  • बुवाई का समय:
    • गर्मी की फसल: जनवरी–मार्च
    • बरसात की फसल: जून–जुलाई

ज्यादा ठंड या पाला फसल को नुकसान पहुंचाता है।

मिट्टी का चयन और खेत की तैयारी

तोरी  की खेती
तोरी  की खेती
तोरी  की खेती
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  • दोमट या बलुई दोमट मिट्टी सबसे अच्छी
  • pH मान: 6.0 – 7.5
  • 2–3 बार गहरी जुताई करें
  • प्रति बीघा 8–10 ट्रॉली सड़ी हुई गोबर खाद मिलाएं
  • मेड़ या क्यारियां बनाएं (नाली व्यवस्था रखें)

3️⃣ बीज का चयन और उपचार

तोरी  की खेती
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तोरी  की खेती
तोरी  की खेती
  • अच्छी किस्में:
    • पूसा नसदार
    • अरका सुजाता
    • नरेन्द्र तोरी-1
  • बीज दर: 2–3 किलो प्रति हेक्टेयर
  • बुवाई से पहले बीज को फफूंदनाशक से उपचारित करें

बीज को 12 घंटे पानी में भिगोने से अंकुरण अच्छा होता है।

4️⃣ बुवाई की विधि

तोरी  की खेती
तोरी  की खेती
  • पंक्ति से पंक्ति दूरी: 1.5–2 मीटर
  • पौधे से पौधे दूरी: 60–100 सेमी
  • प्रति गड्ढा 2–3 बीज डालें
  • अंकुरण 5–7 दिन में हो जाता है

खाद और उर्वरक प्रबंधन

तोरी  की खेती
तोरी  की खेती
तोरी  की खेती
  • गोबर खाद पहले ही डालें
  • NPK (60:40:40 किग्रा/हेक्टेयर)
  • नाइट्रोजन को 2–3 बार में दें
  • जैविक खेती में वर्मी कम्पोस्ट और नीम खली उपयोगी

सिंचाई प्रबंधन

तोरी  की खेती
तोरी  की खेती
तोरी  की खेती
तोरी  की खेती
  • गर्मियों में 4–5 दिन के अंतर पर सिंचाई
  • बरसात में जल निकास का ध्यान रखें
  • ड्रिप सिंचाई से बेहतर उत्पादन

कीट एवं रोग नियंत्रण

तोरी  की खेती
तोरी  की खेती
तोरी  की खेती
तोरी  की खेती

मुख्य कीट:

  • फल मक्खी
  • एफिड

मुख्य रोग:

  • पाउडरी मिल्ड्यू
  • डाउनी मिल्ड्यू

नियंत्रण के लिए नीम तेल या अनुशंसित कीटनाशक का छिड़काव करें।

सहारा (ट्रेलिस) व्यवस्था

तोरी  की खेती
तोरी  की खेती
तोरी  की खेती
तोरी  की खेती
  • बेल को सहारा देने के लिए जाल या बांस का ढांचा बनाएं
  • इससे फल साफ और सीधे बनते हैं
  • उत्पादन बढ़ता है

तुड़ाई और उत्पादन

तोरी  की खेती
तोरी  की खेती
तोरी  की खेती
तोरी  की खेती
  • बुवाई के 50–60 दिन बाद तुड़ाई शुरू
  • 2–3 दिन के अंतराल पर तुड़ाई
  • उत्पादन: 150–250 क्विंटल प्रति हेक्टेयर

लागत और मुनाफा (अनुमान)

खर्चअनुमानित राशि (प्रति हेक्टेयर)
बीज₹4,000 – ₹6,000
खाद व उर्वरक₹15,000 – ₹25,000
सिंचाई₹8,000 – ₹15,000
कुल लागत₹50,000 – ₹80,000
संभावित आय₹2 – 3 लाख

👉 सही प्रबंधन से अच्छा मुनाफा संभव है।

निष्कर्ष

तोरी की खेती कम समय में ज्यादा उत्पादन देने वाली लाभकारी फसल है। सही किस्म, संतुलित खाद, समय पर सिंचाई और कीट नियंत्रण से किसान अच्छी कमाई कर सकते हैं।


❓ FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

Q1. तोरी की बुवाई का सही समय क्या है?
👉 जनवरी–मार्च (गर्मी) और जून–जुलाई (बरसात)।

Q2. प्रति हेक्टेयर कितना उत्पादन मिलता है?
👉 150–250 क्विंटल तक।

Q3. कौन सी किस्म ज्यादा उत्पादन देती है?
👉 पूसा नसदार और अरका सुजाता अच्छी किस्में हैं।

Q4. तोरी में फल मक्खी से कैसे बचाव करें?
👉 नीम तेल या अनुशंसित कीटनाशक का छिड़काव करें।

Q5. तोरी की खेती में कितना समय लगता है?
👉 50–60 दिन में पहली तुड़ाई शुरू हो जाती है।

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