क्या आप मानेंगे कि महज 5 एकड़ जमीन से कोई किसान सालाना 15 लाख रुपये से ज्यादा कमा सकता है? जी हाँ, यह कोई किस्सा नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के रहने वाले किसान राकेश सिंह की सच्ची सफलता की कहानी है। जिन्होंने पारंपरिक खेती छोड़कर वैज्ञानिक मिश्रित खेती (Integrated Farming System) अपनाई और न सिर्फ अपनी आय में 5 गुना इजाफा किया, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए मिसाल बन गए।

वो पल जब बदल गई सोच: “एक फसल पर निर्भरता छोड़ो!”
राकेश सिंह भी पीढ़ियों से गेहूं और धान की पारंपरिक खेती कर रहे थे। लेकिन बढ़ती लागत, मौसम की मार और अस्थिर बाजार भाव ने उन्हें झकझोर दिया। 2018 में एक कृषि प्रदर्शनी में उन्होंने मिश्रित खेती के बारे में जाना और ठान लिया कि अब वह अपने खेत को “एक्टिव इनकम सोर्स” बनाएंगे, न कि सिर्फ अनाज का स्रोत।
राकेश सिंह का 5 एकड़ वाला करोड़पति बनाने वाला मॉडल: जानिए लेयर बाय लेयर
उन्होंने अपनी 5 एकड़ जमीन को एक इंटीग्रेटेड इकोसिस्टम में बदल दिया, जहाँ हर चीज एक-दूसरे से जुड़ी है और कुछ भी बर्बाद नहीं होता।
लेयर 1: मछली पालन + सब्जियों की खेती (2 एकड़)
- उन्होंने 1.5 एकड़ में दो बड़े तालाब बनवाए, जिनमें कतला, रोहू और मृगल मछलियाँ पालनी शुरू कीं।
- तालाब के चारों ओर की मेड़ों (बांधों) का सदुपयोग लतर वाली सब्जियाँ जैसे लौकी, करेला, खीरा और तोरई उगाने में किया।
- फायदा: मछली के अपशिष्ट (मल) से बनी प्राकृतिक खाद सब्जियों के लिए उत्तम पोषण बनी। सब्जियों की जड़ें मेड़ों को मजबूत करती हैं। सिर्फ मछली पालन से ही उन्हें सालाना 4-5 लाख रुपये की शुद्ध आमदनी होने लगी।
लेयर 2: बागवानी + मुर्गी पालन (2 एकड़)
- बची हुई 2 एकड़ जमीन पर उन्होंने आम और अमरूद के बाग लगाए।
- बाग के नीचे की जगह में उन्होंने मुर्गी पालन शेड बनाया (लगभग 500 मुर्गियाँ)।
- फायदा: मुर्गियों की बीट (विष्ठा) बागों के लिए अमृत समान जैविक खाद बनी। बागों में कीट नियंत्रण के लिए मुर्गियाँ प्राकृतिक कीटनाशक का काम करने लगीं। आम और अमरूद की फसल से 2-3 लाख, और अंडे व मुर्गी बेचकर 1.5-2 लाख रुपये की अतिरिक्त आय।
लेयर 3: डेयरी + वर्मीकम्पोस्टिंग (1 एकड़)
- शेष 1 एकड़ में उन्होंने 5 भैंसों और 2 गायों का एक छोटा सा डेयरी फार्म बनाया।
- गोबर का उपयोग वर्मीकम्पोस्ट (केंचुआ खाद) बनाने में किया। यह खाद उनके बाग और सब्जियों के लिए इस्तेमाल हुई और बाकी बची खाद को उन्होंने बेचना भी शुरू किया।
- फायदा: दूध बेचकर 1.5 लाख रुपये सालाना। वर्मीकम्पोस्ट बेचकर 50-60 हज़ार रुपये अतिरिक्त। सबसे बड़ा फायदा: खाद पर होने वाला खर्च लगभग शून्य।
कुल आय का गणित:
- मछली पालन: ₹ 4,50,000
- सब्जियाँ (मेड़ों से): ₹ 1,50,000
- बागवानी (आम/अमरूद): ₹ 2,50,000
- मुर्गी पालन (अंडे + मांस): ₹ 1,75,000
- डेयरी: ₹ 1,50,000
- वर्मीकम्पोस्ट: ₹ 60,000
- कुल अनुमानित शुद्ध आय: ₹ 12,35,000 से ₹ 15,00,000 सालाना
(नोट: यह आंकड़े मौसम, बाजार भाव और प्रबंधन पर निर्भर करते हैं, लेकिन राकेश सिंह की औसत आय इसी रेंज में है।)
मिश्रित खेती के जादूई फायदे: सिर्फ पैसा ही नहीं
- जोखिम कम, आय ज्यादा: एक फसल या स्रोत खराब हो जाए, तो दूसरे स्रोत संभाल लेते हैं। आय स्थिर रहती है।
- प्राकृतिक संसाधनों का श्रेष्ठ उपयोग: पानी, मिट्टी और सूरज की रोशनी का पूरा-पूरा इस्तेमाल। पानी की बचत होती है।
- खाद-दवा का खर्च घटा: एक इकाई का अपशिष्ट दूसरी इकाई के लिए संसाधन बन जाता है। जैविक चक्र बन जाता है।
- सालभर आमदनी: अलग-अलग फसलों और उत्पादों से अलग-अलग मौसम में पैसा आता रहता है।
- पर्यावरण को फायदा: रासायनिक खाद और कीटनाशकों का प्रयोग कम। जैव विविधता बढ़ती है।
आप भी शुरू कर सकते हैं: स्टेप बाय स्टेप गाइड
- जल स्रोत सुनिश्चित करें: मिश्रित खेती के लिए पानी जरूरी है। तालाब, बोरवेल या कुएं की व्यवस्था करें।
- छोटी शुरुआत करें: एक बार में सब कुछ न करें। पहले एक या दो घटक जोड़ें। जैसे फसल + मुर्गी पालन या फसल + डेयरी।
- ट्रेनिंग लें: कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) या कृषि विभाग से जुड़ें। वे आपको तकनीकी जानकारी और सब्सिडी के बारे में बता सकते हैं।
- बाजार तय करें: शुरुआत से पहले ही सोच लें कि आप अपना दूध, मछली, सब्जियाँ कहाँ बेचेंगे। स्थानीय बाजार, होटल या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म अच्छे विकल्प हैं।
- रिकॉर्ड रखें: आय-व्यय का हिसाब रखना बहुत जरूरी है। इससे आपको पता चलेगा कि कौन-सी इकाई सबसे ज्यादा मुनाफेमंद है।
निष्कर्ष: खेती अब मजबूरी नहीं, समृद्धि का मार्ग है!
राकेश सिंह की कहानी साबित करती है कि सही योजना, वैज्ञानिक ज्ञान और मेहनत से खेती न सिर्फ आत्मनिर्भरता का साधन बन सकती है, बल्कि एक लाभदायक उद्यम भी बन सकती है। मिश्रित खेती भविष्य का तरीका है। यह प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर चलने की कला है, जहाँ हर जीव और पौधा एक-दूसरे की मदद करता है और अंत में किसान की तिजोरी भरता है।
अगला कदम आपका है! क्या आप अपने खेत को ऐसी ही समृद्ध इकाई में बदलने के लिए तैयार हैं?
आपके विचार हमारे लिए महत्वपूर्ण हैं! नीचे कमेंट बॉक्स में बताएँ कि आप मिश्रित खेती के बारे में क्या सोचते हैं या अगर आप भी ऐसा कोई मॉडल अपना रहे हैं, तो अपना अनुभव साझा करें। साथ ही, ऐसी ही और सफल किसान कहानियाँ पढ़ने के लिए हमें फॉलो करना न भूलें।